30 साल, 3 चरण और 2.73 लाख करोड़ का निवेश, मुकेश अंबानी की बड़ी तैयारी; बनाएंगे भारत का पहला ‘UCG’ कॉम्प्लेक्स
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने एनर्जी सेक्टर में एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक निवेश का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भारत का पहला ‘इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड कोल गैसिफिकेशन’ (UCG) कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का खाका तैयार किया है। यह कॉम्प्लेक्स आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में स्थापित किया जाएगा। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए अगले 30 वर्षों में लगभग 2.73 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में कोल ब्लॉक ऑक्शन में ‘चिंतलपुडी’ (Chintalapudi) और ‘रेचेरला’ (Recherla) कोल ब्लॉक हासिल किए हैं। इन्हीं ब्लॉक्स में यह प्रोजेक्ट लगाया जाएगा, जहां करीब 3,130 मिलियन टन कोयले का भंडार है।
क्या है रिलायंस इंडस्ट्रीज का प्लान?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह पूरा निवेश 30 साल में तीन चरणों में करने का प्लान बनाया है। बशर्ते कि शुरुआती एक्सप्लोरेशन कामयाब रहे।
- पहला चरण: पहला फेज जो पायलट प्रोजेक्ट होगा, इसे2026 की तीसरी तिमाही से 2027 के अंत तक एक्सप्लोरेशन किया जाएगा, जिसमें 3,000 करोड़ रुपये तक खर्च होंगे।
- दूसरा फेज (डेवलपमेंट): अगर पहला चरण सफल रहता है तो 2028 से 2030 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट किया जाएगा।
- तीसरा फेज (प्रोडक्शन): पहले और दूसरे चरण के बाद 2030 से कमर्शियल उत्पादन शुरू करने के लिए 1.50 लाख करोड़ रुपये लगाए जाएंगे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के ‘नेशनल कोल गैसिफिकेशन मिशन’ के लक्ष्यों के बिल्कुल अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 2030 तक बड़े पैमाने पर कोयले को गैस में तब्दील करना है, और क्रूड के आयात पर निर्भरता को कम करना है।
अंडरग्राउंड कोल गैसिफिकेशन (UCG) क्या है?
कोल गैसीफिकेशन एक थर्मो-केमिकल प्रोसेस है जिसमें ठोस कोयले को सीधे जलाने के बजाय, तेज़ गर्मी, भाप और सीमित ऑक्सीजन का इस्तेमाल करके गैस के मिश्रण में बदला जाता है, जिसे सिनगैस (सिंथेसिस गैस) कहते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना और जमीन की खुदाई किए बिना ऊर्जा प्राप्त की जा सकेगी।
बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट से देश और आंध्रा प्रदेश दोनों को बड़े फायदे होंगे। क्योंकि, इससे सीधे तौर पर 3,000 से 5,000 लोगों को और अप्रत्यक्ष रूप से 20,000 से 35,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस तकनीक से बनी गैस का उपयोग केमिकल और फ्यूल बनाने में होगा, जिससे भारत की महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

