पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े मामले में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की अपील की स्थिति को लेकर अदालत के समक्ष दिए गए बयान और रिकॉर्ड में सामने आई स्थिति के बीच अंतर पाए जाने के बाद हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है सरकार की अपील
मामला पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते से जुड़ा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 3 अगस्त के अपने आदेश में राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA/DR की किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में इस अपील को लेकर कुछ आपत्तियां दर्ज हुई थीं।
मुख्य सचिव के बयान पर अदालत ने जताई आपत्ति
मंगलवार की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की स्थिति रिपोर्ट रखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार की अपील में बताई गई खामियां पूरी तरह दूर नहीं हुई थीं।
इसके विपरीत, मुख्य सचिव की ओर से अदालत में यह बताया गया था कि अपील दोबारा दाखिल कर दी गई है और खामियां दूर कर दी गई हैं। इसी अंतर को लेकर अदालत ने प्रथम दृष्टया गंभीर आपत्ति जताई और मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा।
शुक्रवार को फिर पेश होने का निर्देश
हाई कोर्ट की पीठ ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को होगी।
अदालत की ओर से जारी नोटिस का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य सचिव को अवमानना का दोषी ठहरा दिया गया है। फिलहाल अदालत ने उनसे यह बताने को कहा है कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।
DA भुगतान का है पूरा मामला
3 अगस्त के हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA/DR की किस्तें जारी करनी थीं। इस आदेश के अनुपालन को लेकर बाद में अवमानना संबंधी कार्यवाही शुरू हुई।
सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अपील में दर्ज आपत्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अब हाई कोर्ट मुख्य सचिव के जवाब और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

