डॉ दिनेश शर्मा का कानपुर में सपा पर हमला, पारिवारिक मूल्यों पर भी दिया जोर

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पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि समाज की पारिवारिक व्यवस्था को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। परिवार में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले एक ही घर में चार परिवार साथ रहते थे और आपसी जुड़ाव बना रहता था, लेकिन अब पारिवारिक व्यवस्था में बदलाव आया है।

बुधवार सुबह मानस संगम की ओर से तुलसी उपवन, मोतीझील में आयोजित तुलसी जयंती समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ये मेरा व्यक्तिगत विचार है कि बच्चों को चाहे 50 साल तक पढ़ाएं, लेकिन विवाह की एक उम्र होती है। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष तक शादी और 30 वर्ष तक तीन बच्चे होना जरूरी है। 140 करोड़ की आबादी है। 2030 के बाद आबादी घिरने लगेगी। 65 प्रतिशत युवा 35 प्रतिशत पर आ जाएगा।प्रति जन्मदर घट रहा है। ऐसे में सभी को ध्यान देना होगा। आज तुलसी जयंती मनाने आए हैं, एक समय ऐसा आ सकता है, जब यहां कोई नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए बच्चों में इंसानी संस्कार डालने होंगे। परिवार और समाज की व्यवस्था को बनाए रखने में रामायण की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा, ‘रामायण पढ़ो, यह आवश्यक है, लेकिन रामायण को ग्रहण करो, यह अत्यंत आवश्यक है।’ घर-घर रामायण का पाठ होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहे।

धीमे-धीमे सब पहुंचेंगे रामलला के द्वार

अखिलेश यादव के पीडीए के परिभाषा बदलने के बयान पर पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रम की स्थिति वाली समाजवादी पार्टी है। वो कभी पी से पीड़ित बताते थे, कभी पी से पिछड़ा बताते हैं। अब उनका पंडित आया है। वहीं पंडित जिनको वो अपनी सभाओं से, प्रेस कांफ्रेंस से भगाते थे। जाहिर सी बात है कि श्रद्धा नाम से नहीं क्रिया और कर्म से होती है। समाजवादी पार्टी भाजपा और जनता का सकारात्मक रूख देखकर परेशान हैं। अभी रामलला के चरणों में सब जाएंगे। जो कहते थे कि हम पूजा नहीं करते, भगवान नहीं मानते। केजरीवाल अयोध्या में हनुमान चालीसा करके आए। इटावा का मंदिर खुलने के बाद रामलला का दर्शन करने पूरा परिवार आएगा।

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