Pit ruPaksha: गयाजी से पहले पुनपुन नदी में पिंडदान की मान्यता, सिरिस घाट पर उमड़े श्रद्धालु

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पितृपक्ष के दौरान बिहार के औरंगाबाद जिले में पुनपुन नदी का सिरिस घाट श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शनिवार को यहां बड़ी संख्या में पिंडदानी पहुंचे और अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान व तर्पण किया। धार्मिक परंपरा के अनुसार, गयाजी में पिंडदान से पहले पुनपुन नदी के तट पर प्रथम पिंडदान किया जाता है।

गयाजी से पहले क्यों होता है पुनपुन में पिंडदान?

धार्मिक मान्यता के अनुसार पुनपुन नदी को पितृमोक्ष का पहला द्वार माना जाता है। मान्यता है कि गयाजी की यात्रा शुरू करने से पहले पुनपुन नदी में स्नान, तर्पण और प्रथम पिंडदान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु गयाजी पहुंचकर फल्गु नदी सहित विभिन्न वेदियों पर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करते हैं।

पुनपुन को लेकर एक अन्य धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी है। कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने पूर्वजों के लिए गयाजी जाने से पहले पुनपुन नदी के तट पर पिंडदान किया था। इसी वजह से इस स्थान को गयाजी की धार्मिक यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। यह विवरण धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।

सिरिस घाट पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पिंडदानी

औरंगाबाद के बारुण थाना क्षेत्र में सिरिस गांव के पास स्थित पुनपुन नदी घाट पर पितृपक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई स्थानों से लोग यहां अपने पूर्वजों का तर्पण और प्रथम पिंडदान करने पहुंचे।

श्रद्धालुओं का कहना है कि सनातन परंपरा में पुनपुन नदी में प्रथम पिंडदान का विशेष महत्व है। सिरिस घाट पर कर्मकांड पूरा करने के बाद कई श्रद्धालु आगे गयाजी के लिए रवाना होते हैं।

सुविधाओं के विस्तार की मांग

श्रद्धालुओं ने सिरिस घाट के धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां सुविधाओं के विस्तार की जरूरत भी बताई। घाट को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के साथ श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बड़े धर्मशाला परिसर की मांग सामने आई है।

पितृपक्ष 2026 के दौरान पुनपुन से लेकर गयाजी तक पिंडदान और तर्पण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुनपुन में प्रथम पिंडदान के बाद गयाजी में आगे के कर्मकांड किए जाते हैं।

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