ढोल-नगाड़ों की थाप और सिर पर 108 दीयों का संतुलन! ब्रज के इस चरकुला लोकनृत्य का श्री राधा रानी से है खास नाता

1257 Shares

उत्तर प्रदेश में मथुरा और वृंदावन क्षेत्र राधा-कृष्ण की भक्ति के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसी ब्रज की भूमि से संबंध रखता है चरकुला नृत्य। इसे सिर्फ एक लोक नृत्य समझना हमारी बड़ी भूल होगी, क्योंकि इसमें भक्ति भी है, संस्कृति भी है और कला का अद्भुत रूप भी।

ब्रज का खास चरकुला लोकनृत्य

चरकुला मथुरा वृंदावन की ब्रज भूमि का बेहद लोकप्रिय लोकनृत्य है जिसे महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसकी शुरुआत ब्रज में गोवर्धन के पास स्थित मुखराई गांव से मानी जाती है। यह वही स्थान है जो राधा रानी के ननिहाल के नाम से लोगों के बीच लोकप्रिय है।

क्या है 108 दीयों वाले चरकुला के नाम का रहस्य

चरकुला शब्द चक्र से आया है जिसका मतलब है पहिया या गोल दिखने वाली आकृति। इसमें सबसे निचला हिस्सा गोल आकार का होता है, यही सिर के ऊपर बेस की तरह काम करता है। फिर इसके ऊपर पिरामिड के आकार में 108 दीयों की एक पूरी श्रृंखला रखी जाती है।

राधा रानी के जन्म से जुड़ी है पौराणिक कहानी

ऐसी मान्यता है कि जब राजा वृषभानु और माता कीर्तिदा के घर में राधा रानी का जन्म हुआ तो उनकी नानी मुखरा ने खुशी के मारे अपने सिर पर रथ का पहिया रख लिया और उसमें दीपों को जलाकर फिर नृत्य भी किया। तभी से चरकुला लोकनृत्य की परंपरा यहां शुरू हुई।

गोवर्धन लीला से भी सबंध

एक किंवदंती भगवान श्री कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने से जुड़ी हुई है, इसे गोवर्धन लीला भी कहते हैं। भगवान कृष्ण ने गांव वालों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। चरकुला को इसी पर्वत का प्रतीक भी बताया जाता है, जिसे नर्तकियां प्रतीक के तौर पर दिखाती हैं।

कैसे किया जाता है यह लोकनृत्य?

यह नृत्य घूंघट ओढ़े महिलाओं द्वारा किया जाता है। जिसमें वो अपने सिर पर एक बड़ा सा गोल आधार रखकर पिरामिड की आकार की लकड़ी का संतुलन बनाती हैं। इसके बाद रसिया की लय पर राधा कृष्ण की भक्ति में यह नृत्य किया जाता है।

ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते हैं सभी

गांव में सभी लोग विशेष मौकों पर भक्ति रस में डूबते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते हैं। इसमें कई और वाद्य यंत्र भी उपयोग में लाए जाते हैं, इनमें अलगोजा, पीतल की थाली, बांसुरी, हारमोनियम, करताल और मंजीरा शामिल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *