सांसों की डोर लंबी हो तो काल का चक्र भी उसे काट नहीं सकता। शायद यही वजह रही होगी कि किस्मत के धनी दो युवाओं पर विशालकाय पेड़ गिरा तो जरूर लेकिन उनकी सांसों को उखाड़ नहीं सका। मंडी जिले की बरोट घाटी में यह खौफनाक मंजर हमीरपुर के शुभम और विशाल ने बिलकुल नजदीक से देखा। धूल के गुबार में ओझल होती हुई उनकी जिंदगी मौत को मात देकर फिर मुस्करा उठी।
बैंकिंग परीक्षा का तनाव भुलाने के लिए बरोट की हसीन वादियों में सुकून तलाशने आए हमीरपुर के दो युवाओं को कुदरत का ऐसा रौद्र रूप देखने को मिलेगा, इसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन कहते हैं न कि जितनी सांखें लिखी हों, उतनी लेने से कोई रोक नहीं सकता।
बैंकिंग परीक्षा देने आए थे युवक
वर्तमान में शिमला में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे शुभम और विशाल बुधवार को मंडी में बैंकिंग की परीक्षा देने आए थे। परीक्षा खत्म होते ही दोनों ने बरोट की ठंडी हवाओं में कुछ पल बिताने का प्लान बनाया। वीरवार को दिनभर दोनों ने वहां की खूबसूरती को निहारा, कैमरे में यादें समेटीं और शुक्रवार को शिमला वापसी के लिए रवाना हुए।
भूस्खलन देख रोकी कार
गुराहला के पास पहाड़ी से भूस्खलन होता देख दोनों ने कार रोकी और खूबसूरत तस्वीरों के साथ-साथ प्राकृतिक दृश्यों को कैमरे में कैद करने लगे। यहीं उनकी भेंट बरोट स्कूल की हिंदी प्रवक्ता निशा ठाकुर और उनके पति दीपक से हुई। थोड़ी गपशप के बाद दोनों जैसे ही आगे बढ़े।
कार पिचक गई, युवकों को खरोंच तक नहीं आई
जैसे ही आगे बढ़े अचानक एक विशालकाय देवदार का पेड़ सीधे उनकी चलती कार पर आ गिरा। धमाका इतना तेज था कि कार पूरी तरह से पिचक गई। पलभर के लिए लगा कि सब खत्म हो गया, लेकिन जब धूल का गुबार छटा तो कार के अंदर से दोनों युवक सुरक्षित और बिना एक भी खरोंच के बाहर निकल आए।
यह नया जीवन मिला
सदमे और आभार के आंसुओं के बीच शुभम और विशाल ने कहा कि एक पल ऐसा लगा जैसे काल सामने खड़ा था, लेकिन ईश्वर का हाथ शायद उनके सिर पर था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। भगवान ने सच में हमें नया जीवन दिया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

