बठिंडा नगर निगम चुनाव में 35 सीटों के स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटी आम आदमी पार्टी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर की कमान किसे सौंपी जाए। मेयर पद को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है और राजनीतिक गलियारों में लाबिंग अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
हालांकि निगम सदन में बहुमत के दम पर पार्टी को किसी बाहरी समर्थन की जरूरत नहीं है, लेकिन मेयर का फैसला महज एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा। इसे 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व इस बार केवल मेयर का चेहरा तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के जरिए सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संतुलन साधने की तैयारी में है। बठिंडा जैसे अहम शहरी क्षेत्र में हिंदू-सिख समीकरण, युवा नेतृत्व और विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
मेयर की दौड़ में दो मजबूत नाम
मेयर पद की चर्चा में सबसे प्रमुख नाम पूर्व मेयर पदमजीत सिंह मेहता का सामने आ रहा है। महज 27 वर्षीय पदमजीत मेहता ने अपने करीब सवा साल के कार्यकाल के दौरान शहर में कई विकास कार्यों को गति दी थी। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनका जनाधार और स्वीकार्यता दोनों मजबूत मानी जा रही हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अप्रत्यक्ष तौर पर पदमजीत मेहता को ही मेयर का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा और 35 पार्षदों को जिताने में उनकी सक्रिय भूमिका रही। ऐसे में पार्टी उन्हें दोबारा मेयर बनाकर शहरी वोट बैंक को मजबूत करने का संदेश दे सकती है।
पदमजीत मेहता को आगे बढ़ाने के पीछे कई राजनीतिक कारण भी बताए जा रहे हैं। वह युवा हैं, विदेश से शिक्षित हैं और हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में पार्टी एक साथ युवा नेतृत्व, पढ़े-लिखे चेहरे और हिंदू प्रतिनिधित्व का संदेश देकर कई वर्गों को साधने की कोशिश कर सकती है।
हालांकि मेयर पद की दौड़ केवल एक नाम तक सीमित नहीं है।
संधवां की सास वार्ड-5 से पार्षद
दूसरा प्रमुख नाम पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की सास और वार्ड नंबर-5 से पार्षद हरबंस कौर का है। संधवां सरकार और संगठन दोनों में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। ऐसे में हरबंस कौर की दावेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सूत्रों की मानें तो यदि पार्टी पदमजीत मेहता को मेयर बनाती है, तो हरबंस कौर को सीनियर डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी देकर पिछड़े वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व का संतुलन साध सकती है। हालांकि वार्ड नंबर-7 से पार्षद मनदीप कौर रामगढ़िया का नाम भी चर्चा में है, लेकिन हरबंस कौर की दावेदारी ज्यादा मजबूत मानी जा रही है।
डिप्टी मेयर पद पर एससी चेहरा संभावित
पार्टी की रणनीति अनुसूचित जाति वर्ग को भी नेतृत्व में उचित भागीदारी देने की दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में डिप्टी मेयर पद किसी एससी समुदाय से जुड़े पार्षद को दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पार्षद रत्न राही का नाम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। लगातार दो बार पार्षद चुने गए रत्न राही संगठन में सक्रिय रहने के साथ पूर्व मेयर पदमजीत मेहता और उनके पिता अमरजीत मेहता के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में शीर्ष तीन पदों के जरिए पार्टी हिंदू, सिख, पिछड़ा वर्ग, महिला और अनुसूचित जाति के संतुलन का राजनीतिक संदेश दे सकती है।
2027 विधानसभा चुनाव का ट्रायल भी है निगम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बठिंडा नगर निगम की नई टीम को केवल स्थानीय निकाय प्रशासन के नजरिये से नहीं देखा जा रहा। मालवा क्षेत्र की राजनीति में बठिंडा का विशेष महत्व है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शहरी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता है।
इसी कारण नेतृत्व चयन में जनाधार, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक स्वीकार्यता को अहम माना जा रहा है। निगम की नई टीम आने वाले समय में विकास कार्यों के साथ-साथ पार्टी के राजनीतिक विस्तार का चेहरा भी बनेगी।
बहुमत ने बदले समीकरण, हाईकमान के हाथ में अंतिम फैसला
इस बार 35 सीटों के प्रचंड जनादेश ने पार्टी को पूरी तरह स्वतंत्र बना दिया है। मेयर चुनाव के लिए किसी जोड़-तोड़ की जरूरत नहीं है और यही वजह है कि अब पूरा ध्यान संभावित दावेदारों और हाईकमान की रणनीति पर केंद्रित हो गया है। नगर निगम चुनाव के दौरान भी उम्मीदवारों के चयन में अंतिम फैसला चंडीगढ़ और दिल्ली स्तर पर लिया गया था।
कई वार्डों में स्थानीय नेताओं की पसंद से अलग हाईकमान की राय को प्राथमिकता मिली थी। ऐसे में माना जा रहा है कि मेयर पद पर भी अंतिम मुहर मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से ही लगेगी।
फिलहाल बठिंडा की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि शहर की कमान आखिर किसे सौंपी जाएगी। लेकिन इतना तय है कि यह फैसला केवल नगर निगम का मेयर चुनने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए आम आदमी पार्टी 2027 के विधानसभा रण का राजनीतिक संदेश भी देने की कोशिश करेगी।


