‘रेल मंत्री जी; मालगाड़ी यहां मत रोकिए…’, भागलपुर के इशाकचक क्रॉसिंग पर रोज लग रहा जाम; परेशान लोगों की गुहार
“रेल मंत्री जी, कृपया ध्यान दीजिए… मालगाड़ी को इशाकचक रेलवे समपार पर मत रोकिए!” भागलपुर शहर के दक्षिणी क्षेत्र की लगभग आधी आबादी आज रेल प्रशासन के कुप्रबंधन से परेशान होकर यही गुहार लगा रही है। भोलानाथ और बौंसी लाइन फ्लाईओवरों का निर्माण कार्य चलने से मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हैं, जिसके कारण लालूचक, इशाकचक, ईश्वरनगर, लोदीपुर, बसंतपुर, मिश्रा टोला, लीची बगान और इंद्रप्रस्थ कॉलोनी के निवासियों के पास शहर जाने का एकमात्र यही रास्ता बचा है।
भागलपुर जंक्शन से महज पूर्व दिशा की ओर एक-डेढ़ किलोमीटर पर स्थित यह रेलवे समपार बेहद व्यस्त मार्ग है। दिन-रात यहां से एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी और मालगाड़ियों की लगातार आवाजाही होने से समपार का फाटक अधिकांश समय बंद ही रहता है।
मालगाड़ी के दो-तीन डिब्बे ढके रहते हैं फाटक पर
समपार के दोनों ओर सड़क अत्यंत संकरी है और जगह-जगह अतिक्रमण के कारण स्थिति और विकट हो जाती है। सबसे बड़ी आफत तब आती है जब कहलगांव व साहिबगंज की तरफ से आने वाली मालगाड़ियों को जंक्शन पर एंट्री न मिलने के कारण इसी फाटक के पास खड़ा कर दिया जाता है।
मालगाड़ी के दो-तीन डिब्बे समपार के फाटक के ठीक ऊपर आ खड़े होते हैं, जिससे आधे-पौने घंटे तक फाटक खुल ही नहीं पाता। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्थानीय रेलवे अधिकारियों को आम यात्रियों और नागरिकों की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है।
रेल मंत्री से गुहार और सबौर में मालगाड़ी रोकने का विकल्प
स्थानीय लोगों ने रेल मंत्री से इस पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक भोलानाथ और बौंसी लाइन फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक बिना किसी ठोस कारण के मालगाड़ी को इस समपार पर न रोका जाए। जंक्शन पर लाइन क्लियर न होने की स्थिति में मालगाड़ियों को सबौर रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया जाए और जंक्शन पर जगह मिलते ही वहां से रवाना किया जाए।
नागरिकों ने दूसरा विकल्प देते हुए आग्रह किया कि यदि इशाकचक-भीखनपुर समपार के पास मालगाड़ी को खड़ा करना मजबूरी ही हो, तो उसे फाटक पूरी तरह पार करने के बाद खड़ा किया जाए। लोगों का कहना है कि सिर्फ मालगाड़ी का बेवजह रुकना बंद हो जाए, तो क्षेत्र की कम से कम 50 प्रतिशत ट्रैफिक समस्या अपने आप समाप्त हो जाएगी।
स्कूल और खेल अभ्यास पर पड़ रहा बुरा असर
एक बार जाम में फंसने के बाद लोगों को निकलने में एक घंटे से अधिक का समय बर्बाद हो जाता है। स्थानीय नागरिक प्यारे हिंद और सौरभ कुमार ने बताया कि यहां ट्रैफिक पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे फाटक खुलते ही वाहन आपस में उलझ जाते हैं और विवाद की स्थिति बन जाती है।
इस भीषण जाम का सबसे बुरा असर रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चों और खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लालूचक निवासी बाल क्रिकेटर हरशिव शुक्ला ने बताया, “रोज शाम में जिला स्कूल क्रिकेट का अभ्यास करने जाता हूं, लेकिन समपार के पास आधा घंटा फंसना तय रहता है। सुबह स्कूल जाते समय भी यही हाल रहता है, कई बार देर से पहुंचने पर स्कूल से लौटना पड़ता है।”
गेटमैन भयभीत, स्थानीय लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी
समपार पर रोज-रोज की इस अव्यवस्था से आम जनता का सब्र अब टूट रहा है। अमरदीप शुक्ला नटवर, पीयूष तिवारी, मुकेश सिंह और नीलेश ने कहा कि रेलवे की अनदेखी से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर, लोगों के आक्रोश के बीच ड्यूटी पर तैनात गेटमैन भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इशाकचक व लालूचक के निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि रेल प्रशासन ने मालगाड़ी के ठहराव का विकल्प तुरंत नहीं लागू किया, तो वे समपार पर उतरकर जोरदार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को विवश होंगे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

