हाईकोर्ट में उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से विगत दिवस रजिस्ट्री में दायर शपथ पत्र वापस ले लिया, यह शपथ पत्र अभी हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में नहीं आया था।
सरकार ने नया शपथ पत्र दायर करने के लिए 27 अगस्त तक का समय मांगा है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई को 10 सितंबर की तिथि नियत की है। अगली सुनवाई को तीन सचिव कोर्ट में पेश होंगे।
वर्चुअली पेश हुए भारत सरकार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
उपनल कर्मचारी संघ ने अदालत के निर्देशों के विपरीत सरकार की ओर से उपनल कर्मियों से अनुबंध भराए जाने पर घोर आपत्ति की है। गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में सरकार की ओर से भारत सरकार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअली कोर्ट में पेश हुए।
उन्होंने हाई कोर्ट के आदेशों का अवलोकन करने तीन सप्ताह का समय मांगा। जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 10 सितंबर तय की है। अब दस सितंबर को सचिव कार्मिक व सतर्कता शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव सैनिक कल्याण बोर्ड युगल पंत को कोर्ट में पेश होना होगा।
पिछले एक वर्ष से प्रदेश सरकार की ओर से आदेश का पालन करने को अतिरिक्त समय की मांग की जा रही है ,जिसे लेकर प्रदेश भर के उपनल कर्मियों में आक्रोश है। संघ की ओर से दायर अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि 2018 में हाई कोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 मे संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। जब हाई कोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई अब कोर्ट इस मामले में सख्त है। सरकार के रुख पर 22 हजार कर्मचारियों का नियमितीकरण टिका है ।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

