शराब के नशे में स्कूल में दुर्व्यवहार करने वाले शिक्षक पर कड़ा एक्शन, हिमाचल शिक्षा विभाग ने नौकरी से की छुट्टीहिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए टीजीटी नॉन मेडिकल मोहिंदर सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया है। विभागीय जांच में शिक्षक पर लगाए गए गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद यह निर्णय लिया गया। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मोहिंदर सिंह के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम-14 के तहत विभागीय जांच शुरू की गई थी। शराब के नशे में अभद्र व्यवहार किया उन पर आरोप था कि वे कई बार शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे, सरकारी दायित्वों की अनदेखी की, बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे तथा विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। विभाग ने इसे सरकारी कर्मचारी के आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए टीजीटी नॉन मेडिकल मोहिंदर सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश दिया है। विभागीय जांच में शिक्षक पर लगाए गए गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद यह निर्णय लिया गया। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मोहिंदर सिंह के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम-14 के तहत विभागीय जांच शुरू की गई थी।
शराब के नशे में अभद्र व्यवहार किया
उन पर आरोप था कि वे कई बार शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे, सरकारी दायित्वों की अनदेखी की, बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे तथा विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। विभाग ने इसे सरकारी कर्मचारी के आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
शिक्षक ने नकारे आरोप
जांच के दौरान शिक्षक ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन एवं दुर्गम क्षेत्रों में ईमानदारी से सेवाएं दी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह पैंक्रियाटाइटिस और मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं और उनके खिलाफ शिकायत झूठी और तथ्यों से परे है। उन्होंने प्रारंभिक जांच पर भी सवाल उठाए और वीडियो साक्ष्य को छेड़छाड़ किया हुआ बताया।
जांच अधिकारी ने दिया यह तर्क
विभागीय जांच अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर शिक्षक की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी संबंधी दावे यह साबित नहीं करते कि शिक्षक शराब के नशे में स्कूल आने, सरकारी कार्यों की उपेक्षा करने और विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपों से मुक्त हैं। साथ ही झूठी शिकायत और फर्जी साक्ष्य संबंधी आरोपों के समर्थन में भी कोई विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
शिक्षक से रहती है आदर्श आचरण की अपेक्षा
आदेश में कहा गया है कि एक सरकारी शिक्षक से अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में शराब के नशे में विद्यालय पहुंचना, सरकारी दायित्वों की उपेक्षा करना और छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट करना अत्यंत गंभीर कदाचार है, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
भ्रष्टाचार का आरोप सही नहीं
विभाग ने यह भी माना कि मामले में वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। इसी कारण सेवा से बर्खास्तगी या पद से हटाने जैसी कठोर सजा के बजाय केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1965 के नियम 11(7) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड उचित समझा गया।
निदेशक ने जारी किया आदेश
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी आदेश के अनुसार मोहिंदर सिंह, टीजीटी (नॉन-मेडिकल), राजकीय उच्च विद्यालय कंड (कॉम्प्लेक्स जीएमएसएसएस डारी), जिला कांगड़ा को 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्त किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन्हें मिलने वाले पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रचलित सीसीएस (पेंशन) नियमों तथा सरकारी निर्देशों के अनुसार दिए जाएंगे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

