‘कचरा साफ करो वरना…’, बेंगलुरु के प्रॉपर्टी मालिकों को डीके शिवकुमार की कड़ी चेतावनी

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 बेंगलुरु की सड़कों के किनारे और खाली जमीनों पर फेंका गया निर्माण कार्य का मलबा शहर के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। शहर में रह रहे लोगों का मानना है कि इससे न सिर्फ शहर की खूबसूरती खराब हो रही है, बल्कि गंदगी, मच्छरों, चूहों और सांपों के बढ़ने से लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।

ऐसे में अब इस समस्या से निपटने के लिए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) ने एक महीने तक चलने वाले ‘फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट’ (कचरे से आजादी) अभियान की शुरुआत की है। बता दें कि यह विशेष अभियान पूरे अगस्त महीने तक चलाया जाएगा।

शहर में 1616 की जगहों की हुई पहचान

इसके लिए अधिकारियों ने पूरे शहर में 1616 ऐसी जगहों की पहचान की है, जहां अवैध रूप से मलबा फेंका गया है। इस अभियान के तहत शहर से लगभग 22730 मीट्रिक टन मलबे और कचरे को साफ किया जाएगा।

बता दें कि इस मलबे को शहर से हटाकर यारप्पनहल्ली, मरेनहल्ली, वेंकटपुरा, विट्टासंद्रा और कल्लूबलू जैसी तय की गई जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए 70 टिपर तैनात की गई हैं।

सीएम शिवकुमार की कड़ी चेतावनी

वहीं इस मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों को साफ रखना सरकार की जिम्मेदारी है, तो अपनी निजी संपत्तियों को साफ रखना नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने प्लॉट खरीदने के बाद पांच साल तक भी घर नहीं बनाए हैं, उन्हें नोटिस भेजकर उनकी संपत्ति वापस ले ली जाएगी।

मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने क्या बोला?

एनडीटीवी से बात करते हुए बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने बताया कि मलबे पर धीरे-धीरे खरपतवार उग आती है, जिससे वह चूहों, मच्छरों और सांपों का छिपने का ठिकाना बन जाता है। लोग इस मलबे पर घरेलू कचरा भी फेंकना शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इस अगस्त महीने में हम इसी समस्या को खत्म कर रहे हैं, और इसके बाद घरेलू कचरे के लिए एक अलग अभियान चलाया जाएगा।

नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त निर्देश

इसके अलावा सरकार ने खाली जमीनों के मालिकों से अपील की है कि वे अपने प्लॉट साफ करवा लें। यदि 15 अगस्त तक प्लॉट साफ नहीं किए गए, तो संबंधित निगम खुद कचरा हटाएगा और उसका खर्चा जमीन के मालिकों से ही वसूला जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि पहली बार गलती करने पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और बार-बार नियम तोड़ने पर 50000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना वसूला जाएगा।

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