ऊंची इमारतों में सुविधा की पहचान बन चुकी लिफ्ट अब लोगों के लिए डर की वजह बनती जा रही है। लोकल सर्कल्स के देशव्यापी सर्वे ने रिहायशी इमारतों की लिफ्ट सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है।
297 जिलों के 34 हजार से अधिक लोगों पर हुए सर्वे में 46 प्रतिशत लोगों या उनके परिवार का सदस्य पिछले एक साल में लिफ्ट में फंस चुका है, जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने अपनी बिल्डिंग की लिफ्ट की सुरक्षा पर भरोसा नहीं जताया।
ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लिफ्ट को ‘कामन कैरियर’ घोषित किया और स्पष्ट किया कि लिफ्ट हादसे की स्थिति में निर्माता, मेंटेनेंस एजेंसी और भवन मालिक तीनों संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे।
क्या होना चाहिए?
- सभी लिफ्टों का अनिवार्य पंजीकरण
- वैध एएमसी और नियमित प्रिवेंटिव मेंटेनेंस
- समय-समय पर थर्ड पार्टी सुरक्षा आडिट
- मेंटेनेंस लाग का रिकार्ड
- खराब लिफ्ट को तुरंत सेवा से बाहर करना
- आपातकालीन बचाव के लिए प्रशिक्षण
देशभर में क्यों बढ़ी चिंता?
- दिल्ली- रा परिसर लिफ्ट हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने लिफ्ट को ‘कामन कैरियर’ माना।
- उत्तर प्रदेश- लिफ्ट एवं एस्केलेटर
- अधिनियम-2024 लागू व नियमित निरीक्षण अनिवार्य।
- महाराष्ट्र- निरीक्षकों की कमी से लिफ्टों का निरीक्षण समय पर नहीं हो पा रहा।
- तैलंगाना- हाईकोर्ट ने लिफ्ट सुरक्षा कानून लागू करने में देरी पर सवाल उठाए।
- नासिक- नागपुर की हालिया घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली।
- बीआइएस का आइएस- 17900 सुरक्षा
- मानक लागू, लेकिन पूरे देश में अब भी एक समान अनिवार्य कानून नहीं।
- करीब 17 राज्यों में ही लिफ्ट कानून, अनुपालन राज्यों के अनुसार अलग-अलग है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

