पछोहा क्षेत्र स्थित आमतारा साधन सहकारी समिति 15 दिनों से बंद होने से किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि समिति से खाद उपलब्ध न होने का लाभ निजी विक्रेता उठा रहे हैं और यूरिया व डीएपी निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बेच रहे हैं।
किसानों को 1500 रुपये वाली डीएपी 1800 रुपये प्रति बोरी और 266.50 रुपये वाली यूरिया 400 रुपये प्रति बोरी मिल रही है, जिससे किसान परेशान हैं।
नईबस्ती निवासी कुलदीप यादव, कुरारी के वीरेंद्र पाल, गिरधरपुर के आशीष कुमार, गौटिया जमालपुर के कल्लू सिंह, अनंगपुर के संदेश, पंकज, सोनू, मोनू, अभिषेक और राममिलन आदि किसानों ने बताया कि उन्हें डीएपी और यूरिया के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
उनका आरोप है कि समितियों पर प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता देकर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि सामान्य किसानों से खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक सहित विभिन्न दस्तावेज मांगे जाते हैं। घंटों इंतजार कराने के बाद कई बार स्टाक समाप्त होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
किसानों का यह भी आरोप है कि आमतारा साधन सहकारी समिति का गोदाम दिन में बहुत कम समय के लिए खोला जाता है तथा रात में खाद वितरण किए जाने की चर्चा है। बताया कि खाद वितरण कार्य में नियमित कर्मचारियों के स्थान पर निजी कर्मियों को लगाया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसानों के अनुसार अनंगपुर, सुल्तानपुर, पिपरिया, आमतारा, नारायनपुर और कमालपुर समेत आसपास के गांवों की निजी दुकानों पर डीएपी लगभग 1,800 रुपये प्रति बोरी व यूरिया 400 रुपये प्रति बोरी तक बेची जा रही है, जबकि सरकारी दर इससे काफी कम है।
खंड विकास अधिकारी भरखनी अशोक द्विवेदी ने बताया कि आमतारा गोदाम के बंद रहने, निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर खाद बिक्री तथा किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और शिकायतें सही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं समिति के सचिव सुनील सिंह ने किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनकी तबीयत खराब होने के कारण वह समिति पर नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाद वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती जा रही है।


