गुरु गोरक्ष की नगरी में अब पर्यटन के साथ-साथ होम-स्टे संस्कृति भी तेजी से पांव पसार रही। पर्यटकों को घर के माहौल में रहने का अवसर दे रही। प्रदेश सरकार की पहल पर शुरू हुई होम-स्टे योजना को गोरखपुर में लोगों ने उत्साह के साथ अपनाना शुरू कर दिया है। मात्र तीन महीने में 20 से अधिक लोगों ने अपने घरों को होम-स्टे के रूप में विकसित कर पर्यटकों को ठहराना भी शुरू कर दिया है। दर्जन भर से अधिक आवेदन पंजीकरण प्रक्रिया में हैं।
पर्यटन विभाग के अनुसार प्रदेश भर में होम-स्टे योजना से जुड़ने के लिए अबतक लगभग 3000 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें करीब 900 का पंजीकरण पूरा हो चुका है। गोरखपुर में लोगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभाग ने 300 होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य तय किया है।
योजना का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत लोग अपने खाली कमरों या अतिरिक्त हिस्से को पर्यटकों के लिए तैयार कर घरेलू वातावरण में ठहरने की सुविधा दे सकते हैं। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को होटल जैसी औपचारिकता के बजाय पारिवारिक माहौल मिलता है।
सरकार ने योजना को आकर्षक बनाने के लिए कई रियायतें भी दी हैं। होम-स्टे संचालकों को जीएसटी और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन की अनिवार्यता से राहत दी गई है। जलकर, गृहकर समेत अन्य कर भी आवासीय श्रेणी में ही रखे गए हैं। यही वजह है कि मध्यमवर्गीय परिवारों में इस योजना को लेकर खास उत्साह दिखाई दे रहा है।
शहर ही नहीं गांव में भी होम-स्टे
योजना को शहर तक ही सीमित नहीं रखा गया है। इसे गांव से भी जोड़ा गया है। ऐसे में इसे शहरी व ग्रामीण होम-स्टे में बांटा गया है। हर उस आवासीय भवन को होम-स्टे के अंतर्गत पंजीकरण कराने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें अधिकतम 12 शैय्या वाले छह कमरे ऐसे हों, जिसमें पर्यटकों को ठहराया जा सकता है। शर्त यह है कि भवन का मालिक होम-स्टे के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति हो।
किराये या लीज पर भवन लेकर इस योजना का लाभ उठाया जा सकता है। शहरी होम-स्टे योजना में कमरों को दो श्रेणी में रखा गया है। गोल्ड व सिल्वर। गोल्ड श्रेणी में कमरों से अटैच वाशरूम होने की अनिवार्यता है जबकि सिल्वर श्रेणी में कामन वाशरूम की सुविधा मिलनी है। गोल्ड श्रेणी में पंजीकरण का शुल्क 3000 व सिल्वर श्रेणी में 2000 रुपये रखा गया है। डारमेट्री वाले ग्रामीण होम-स्टे के लिए आवेदकों को केवल 100 रुपये ही पंजीकरण शुल्क देने की व्यवस्था है।


