महाराष्ट्र का यह पारंपरिक लोकगीत आज भी शादियों की शान, श्रीदेवी की फिल्म में शामिल होने के बाद मिली देशभर में पहचान
महाराष्ट्र का एक पारंपरिक लोकगीत आज भी शादी-ब्याह और मांगलिक आयोजनों की पहली पसंद बना हुआ है। वर्षों पुरानी इस लोकधुन को नई पहचान तब मिली, जब इसे अभिनेत्री श्रीदेवी की एक सुपरहिट फिल्म में शामिल किया गया। फिल्म की सफलता के साथ यह गीत भी देशभर में बेहद लोकप्रिय हो गया।
इस लोकगीत की मधुर धुन और पारंपरिक शैली ने दर्शकों और श्रोताओं का दिल जीत लिया। फिल्म में इस्तेमाल होने के बाद इसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई और यह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभरा।
आज भी यह गीत महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में होने वाले विवाह समारोहों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुनाई देता है। इसकी लोकधुन और पारिवारिक माहौल से जुड़ा भाव इसे पीढ़ी दर पीढ़ी लोकप्रिय बनाए हुए है।
संगीत प्रेमियों का मानना है कि फिल्मों के जरिए पारंपरिक लोकगीतों को नई पहचान मिलती है और वे नई पीढ़ी तक आसानी से पहुंचते हैं। यही वजह है कि यह गीत दशकों बाद भी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखे हुए है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

