सिंगरौली। प्रभारी मंत्री संपतिया उइके के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले जिले में पुलिस विभाग के तबादलों को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। जिले में तबादलों की सूची जारी होने के बाद अब कुछ नामों को बचाने और कुछ अधिकारियों की पसंदीदा पोस्टिंग बरकरार रखने के लिए कथित तौर पर सिफारिशों का दौर तेज होने की चर्चाएं हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है। सूत्रों के अनुसार, तबादला सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों और उनके समर्थकों द्वारा भोपाल तक दौड़-धूप की जा रही है। चर्चा यह भी है कि प्रभावशाली लोगों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से तबादले रुकवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि इनमें कोई बदलाव होता है तो प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना तय माना जा रहा है।

एक एसआई के तबादले ने बढ़ाई हलचल
पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एक ऐसे सब-इंस्पेक्टर (एसआई) को लेकर है, जिसका हाल ही में तबादला किया गया था। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संबंधित अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर पहले भी कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। अब तबादला आदेश के बाद उसे रुकवाने की कथित कोशिशों ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चित बना दिया है। सूत्रों का दावा है कि तबादला सूची जारी होने के बाद भोपाल में लगातार सिफारिशें कराई जा रही हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कमाऊ चौकियों पर सबसे ज्यादा नजर?
जिले की कुछ चौकियों और थानों को लंबे समय से “कमाऊ पोस्टिंग” के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में हर तबादला सूची के साथ इन स्थानों पर पदस्थापना को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। इस बार भी यही स्थिति बताई जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पोस्टिंग केवल प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर हो रही है या फिर कहीं और से भी दबाव काम कर रहा है?
संवेदनशील चौकी बिना प्रभारी, सुरक्षा पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश सीमा से सटी एक महत्वपूर्ण चौकी लंबे समय से प्रभारी विहीन बताई जा रही है। यह चौकी कानून-व्यवस्था और अंतरराज्यीय गतिविधियों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में वहां नियमित प्रभारी की नियुक्ति न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक मजबूती प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले बढ़ा सियासी तापमान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले यदि तबादला सूची में कोई बदलाव होता है, तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है। वहीं यदि सूची यथावत रहती है, तो कई अधिकारियों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रशासन और राजनीति दोनों के लिए अहम माने जा रहे हैं।
पारदर्शिता पर सवाल
तबादलों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी निर्णय निर्धारित नियमों, पात्रता और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर लिए जा रहे हैं, या फिर प्रभाव और सिफारिशों का भी असर दिखाई दे रहा है। यदि तबादला आदेशों में अंतिम समय पर बदलाव किए जाते हैं, तो पारदर्शिता को लेकर नई बहस छिड़ सकती है।
फिलहाल पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जारी तबादला सूची में कोई बदलाव होता है या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का बड़ा विषय भी बन सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

