सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में बच्चों को मोहरा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ एक कथित झूठे POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) मामले को खारिज कर दिया।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आपराधिक कानूनों का दुरुपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत या वैवाहिक विवादों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मामले में लगाए गए आरोप टिकाऊ नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने POCSO से जुड़ी कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के हित सर्वोपरि हैं और उन्हें पारिवारिक या वैवाहिक विवादों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने ऐसे मामलों में कानून के जिम्मेदार और संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

