नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब उन जानवरों पर भी साफ दिखाई देने लगा है, जिन्हें कभी अत्यधिक गर्मी सहने के लिए जाना जाता था। ‘रेगिस्तान का जहाज’ कहलाने वाले ऊंट भी अफ्रीका के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और तपती रेत की वजह से गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी उनके स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। इससे रेगिस्तान की रेत अत्यधिक गर्म हो गई है, जिसके कारण ऊंटों के पैरों और शरीर की त्वचा पर असर पड़ रहा है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्म वातावरण में रहने से उनके लिए भोजन और पानी की उपलब्धता भी चुनौती बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने से वन्यजीवों और पालतू पशुओं दोनों पर दबाव बढ़ रहा है। अफ्रीका के कई क्षेत्रों में सूखे और पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे ऊंटों सहित अन्य पशुओं के सामने अस्तित्व का संकट गहराने लगा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में लगातार वृद्धि का सिलसिला जारी रहा, तो इसका असर केवल ऊंटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ेगा। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और पशुओं के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक माना जा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

