नई दिल्ली: CJP प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के फर्जी AI-जनरेटेड वीडियो प्रसारित किए जाने का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में इन वीडियो के पीछे पाकिस्तान से जुड़े डिजिटल नेटवर्क और समन्वित दुष्प्रचार अभियान की आशंका जताई गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किए गए इन वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर नेताओं के कथित बयान तैयार किए गए थे। तकनीकी विश्लेषण के दौरान कई संदिग्ध डिजिटल अकाउंट और विदेशी स्रोतों से जुड़े लिंक सामने आए हैं, जिनकी गहन जांच जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इन फर्जी वीडियो का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान भ्रम फैलाना, जनमत को प्रभावित करना और सामाजिक तनाव बढ़ाना था। इसी आधार पर संबंधित डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी गई है।
सुरक्षा एजेंसियां मामले में डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया गतिविधियों और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और एजेंसियां सभी पहलुओं की पुष्टि में जुटी हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

