11 साल पुराने बहबल कलां गोलीकांड में आज फिर हलचल, SIT के सवालों का सामना करेंगे सुखबीर बादल; सुरक्षा कड़ी

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वर्ष 2015 के बहबल कलां गोलीकांड और बेअदबी मामलों की जांच कर रही पंजाब सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के समक्ष शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल सोमवार को पेश होंगे। एसआईटी ने उन्हें सुबह 11 बजे पूछताछ के लिए तलब किया है। इस बहुचर्चित मामले को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-32 क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

सुरक्षा कारणों से अदालत परिसर से सटे चार शिक्षण संस्थानों को सोमवार के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। जीजीडीएसडी कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. अजय शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की एडवाइजरी और पंजाब पुलिस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट के एसडी कॉलेज परिसर से सटे होने के कारण विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीजीडीएसडी कॉलेज, पीएमएल एसडी बिजनेस स्कूल, पीएमएल एसडी पब्लिक स्कूल तथा जीजीडीएसडी कालेज सोसायटी कार्यालय बंद है।

2015 की घटनाओं से जुड़ा मामला

जून 2015 में फरीदकोट जिले के गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप चोरी हो गया था। इसके बाद 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी गांव में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन अंग बिखरे मिले। इस घटना से पूरे पंजाब में रोष फैल गया और सिख संगठनों ने कोटकपूरा तथा बहबल कलां में शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया।

14 अक्टूबर 2015 को बहबल कलां में प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। पुलिस फायरिंग में गांव निहाल सिंह वाला के कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। इसी दिन कोटकपूरा में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था। इन घटनाओं ने पंजाब की राजनीति और सामाजिक माहौल पर गहरा असर डाला।

अकाली दल-भाजपा की सरकार थी

जिस समय ये घटनाक्रम हुआ, उस समय राज्य में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार थी और विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। माना जाता है कि इन घटनाओं का असर 2017 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला। मामले की जांच के लिए समय-समय पर कई एसआईटी गठित की गईं।

जुलाई 2026 में डीआईजी हरजीत सिंह की अगुवाई में गठित नई एसआईटी ने बुर्ज जवाहर सिंह वाला, बरगाड़ी और बहबल कलां का दौरा कर घटनास्थलों का पुनर्निर्माण किया तथा पुराने साक्ष्यों और दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, भाजपा नेता विजय सांपला, पूर्व ओएसडी गगनदीप सिंह बराड़, तत्कालीन उपायुक्त मलविंदर सिंह जग्गी और अकाली नेता मंतर सिंह बराड़ सहित कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

मामले में सियासत तेज, न्याय का इंतजार

इसी कड़ी में एसआईटी ने अब सुखबीर सिंह बादल को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी उस समय की सरकार के फैसलों, प्रशासनिक कार्रवाई और घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उनसे सवाल कर सकती है। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि अब इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।

करीब 11 वर्ष बाद भी बहबल कलां गोलीकांड और बेअदबी मामलों में न्याय की मांग कायम है। पीड़ित परिवारों और सिख संगठनों का कहना है कि दोषियों को सजा मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

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