सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली के विद्युत विभाग में उपयंत्री के पद पर पदस्थ प्रवीण कुमार गोस्वामी एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में हैं। उनकी प्रारंभिक नियुक्ति से लेकर पदोन्नति, विभागीय कार्यप्रणाली तथा वर्षों से उनके विरुद्ध की गई शिकायतों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गोस्वामी श्रृंखला के पूर्व प्रकाशित भागों में भी उनके कार्यकाल से जुड़े कई मामलों को प्रमुखता से उठाया गया था। अब श्रृंखला के आठवें भाग में उन शिकायतों और जांचों पर चर्चा की जा रही है, जिन पर अब तक स्पष्ट निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हो सके हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रवीण कुमार गोस्वामी की प्रारंभिक नियुक्ति नगर पालिका निगम में समयपाल के पद पर हुई थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उस समय समयपाल पद पर नियुक्ति के लिए हायर सेकेंडरी में गणित विषय होना आवश्यक था, जबकि गोस्वामी ने हायर सेकेंडरी बायोलॉजी विषय से उत्तीर्ण की थी। इसी आधार पर आरोप लगाया जाता रहा है कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।

2013 की पदोन्नति पर सबसे बड़े सवाल
गोस्वामी श्रृंखला के पिछले भागों में भी वर्ष 2013 में हुई पदोन्नति को लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस समय विद्युत उपयंत्री पद रिक्त नहीं था, फिर भी तत्कालीन उपायुक्त सी.पी. पांडेय द्वारा प्रवीण कुमार गोस्वामी को पदोन्नति प्रदान की गई। शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान गोस्वामी द्वारा विभाग में प्रस्तुत किया गया चरित्र प्रमाण पत्र विधिसम्मत नहीं था और उसे स्वयं उनके द्वारा लिखा गया बताया गया। सूत्रों का दावा है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
सूत्रों के अनुसार तत्कालीन उपायुक्त द्वारा सभी नियमों को दरकिनार करते हुए पदोन्नति दिए जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बदले गोस्वामी द्वारा तत्कालीन अधिकारी को निजी लाभ पहुंचाया गया। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से दोष सिद्ध नहीं किया गया है और इसलिए इन दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगी।
राजधानी तक पहुंचीं शिकायतें, फिर भी कार्रवाई अधर में?
बताया जाता है कि पिछले कई वर्षों में गोस्वामी के विरुद्ध अनेक शिकायतें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सहित राजधानी स्थित वरिष्ठ कार्यालयों तक भेजी गईं। इन शिकायतों के आधार पर समय-समय पर जांच के निर्देश भी जारी किए गए। सूत्रों का आरोप है कि हर बार जांच अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। वहीं सूत्र दावा करते हैं कि जांचों को प्रभावित किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन यही कारण है कि अब जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जून 2025 के पत्र पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार जून 2025 को जारी एक पत्र में प्रवीण कुमार गोस्वामी से संबंधित शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी नगर पालिका निगम सिंगरौली के आयुक्त को सौंपी गई थी। पत्र में शिकायतों की जांच कर यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए बताए जाते हैं। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उस जांच में क्या प्रगति हुई, क्या जांच रिपोर्ट तैयार हुई, क्या शिकायतें सही पाई गईं अथवा उन्हें निराधार माना गया। यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और यदि लंबित है तो देरी का कारण क्या है—यह सवाल लगातार उठ रहे हैं।
पहले भी कई मामलों में घिरे रहे गोस्वामी
गोस्वामी श्रृंखला के पिछले भागों में जिन प्रमुख मुद्दों को उठाया गया था, उनमें—
- प्रारंभिक नियुक्ति की वैधता पर सवाल।
- वर्ष 2013 की पदोन्नति प्रक्रिया पर विवाद।
- कथित फर्जी लेटर पैड प्रकरण से जुड़े आरोप।
- विभागीय शिकायतों और लंबित जांचों का मामला।
- कथित रूप से कुछ संविदाकारों के साथ नजदीकियों को लेकर उठे प्रश्न।
- विभागीय कार्यों में पारदर्शिता को लेकर शिकायतें।
इन सभी मामलों में अब तक कोई समग्र और सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध वर्षों से लगातार शिकायतें होती रही हैं और उन पर जांच के आदेश भी जारी होते रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से जनता यह जानना चाहती है कि उन जांचों का अंतिम परिणाम क्या रहा। अब निगाहें नगर पालिका निगम सिंगरौली के वर्तमान आयुक्त और नगरीय प्रशासन विभाग पर टिकी हैं कि जून 2025 के पत्र के आधार पर हुई जांच की वास्तविक स्थिति कब सामने आती है और क्या विभाग इस पूरे मामले में पारदर्शी रुख अपनाते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

