नैनीताल में नया चलन, ऑफ सीजन में भी सरोवर नगरी पर्यटकों से सरोबार

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नैनीताल में ऑफ सीजन में पर्यटकों की चहल पहल है। मानसून की रिमझिम फुहारों के साथ औसतन रोजाना दो हजार से अधिक सैलानी नगर भ्रमण पर पहुंच रहे हैं।

एक दौर वह भी था जब जुलाई में मानसून की बारिश के साथ पर्यटन सीजन धुल जाया करता था। सैलानी तो दूर स्थानीय लोग भी मुश्किल से मालरोड में पर नजर आते थे। नगर के आंतरिक पर्यटन स्थलों में विरानी छा जाती थी।

धीरे-धीरे बढ़ने लगी संख्या

नौकायन ठप रहता था और पर्यटन पर आश्रित प्रतिष्ठान 70 प्रतिशत से अधिक बंद हो जाया करते थे। ऑफ सीजन का यह दौर सितंबर तक जारी रहा करता था। इसके बाद बंगाली सीजन यानि आटम सीजन शुरू होता था, जो अक्टूबर अंत तक जारी रहता था।

मगर अब हालात बदल चले हैं और पिछले करीब डेढ़ दशक से मानसून की तेज बारिश के बीच सैलानियों का पहुंचना शुरू हुआ और धीरे धीरे उनकी संख्या बढ़ने लगी। वर्तमान में पर्यटकों की बड़ी संख्या में पहुंचने से ऑफ सीजन का एहसास भुला दिया है।

पर्यटकों की आमद से पुराने सारे रिकार्ड टूट चले हैं और रोजाना हजारों की संख्या में पहुंचने लगे हैं। वीकेंड पर सैलानियों की संख्या सर्वाधिक रहती है। पिछले दो वीकेंड पर सैलानियों की आमद 12 हजार से अधिक रही तो बीच के दिनों में भी हजार से अधिक पहुंच जाती है।

खत्म हो गई ऑफ सीजन की अवधारणा

नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट का कहना है कि अब मानसून में ऑफ सीजन नहीं होता। सैलानी बड़ी संख्या में यहां पहुंचने लगे हैं। खासकर वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऑफ सीजन में पर्यटकों को होटलों के रेट में भी रियायतें मिलती हैं।

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