मशरक प्रखंड के धर्मासती गंडामन गांव में वर्ष 2013 की मिड डे मील त्रासदी की 13वीं बरसी पर गुरुवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। नव स्थापित प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हादसे में जान गंवाने वाले 23 मासूम बच्चों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
इस दौरान मृतक बच्चों के स्वजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, समाजसेवी और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों ने गंडामन हादसे को देश की मध्याह्न भोजन योजना के इतिहास का सबसे दर्दनाक और काला अध्याय बताया।
वक्ताओं ने कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और विद्यालयों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता एवं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने कहा कि इस त्रासदी से सबक लेते हुए स्कूलों में भोजन की तैयारी से लेकर वितरण तक हर स्तर पर सतर्कता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, श्रद्धांजलि सभा में किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी के नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी देखी गई। सिर्फ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पहुंचे थे।
मृतक बच्चों के स्वजन और ग्रामीणों ने कहा कि जिस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था, उसकी बरसी पर भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता दुर्भाग्यपूर्ण है।
स्वजन शंकर ठाकुर, सुरेंद्र यादव सहित अन्य लोगों ने कहा कि पहले कुछ अधिकारी और जनप्रतिनिधि श्रद्धांजलि देने पहुंचते थे, लेकिन अब प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते हैं।
ग्रामीणों ने 16 जुलाई 2013 की उस भयावह घटना को याद करते हुए बताया कि विद्यालय में तैयार किए गए मध्याह्न भोजन में कथित रूप से कीटनाशक युक्त पदार्थ मिल जाने से भोजन विषाक्त हो गया था। भोजन करने के बाद बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी।
आनन-फानन में बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन 23 मासूमों की जान नहीं बचाई जा सकी। कई अन्य बच्चे और एक रसोइया लंबे इलाज के बाद स्वस्थ हुए थे।
इस हादसे के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था तथा मिड डे मील योजना की निगरानी व्यवस्था पर व्यापक बहस छिड़ गई थी।
श्रद्धांजलि सभा में विद्यालय परिसर स्थित स्मारक की बदहाल स्थिति भी प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद मृत बच्चों की स्मृति में बनाए गए स्मारक की नियमित देखभाल नहीं होने से वह जर्जर हो चुका है। कई हिस्सों में टूट-फूट होने लगी है और परिसर का समुचित रखरखाव भी नहीं हो रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

