तमिल गीतकार आर. वैरामुथु को 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित, रचा नया साहित्यिक इतिहास

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नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित तमिल कवि, गीतकार और साहित्यकार आर. वैरामुथु को वर्ष 2025 के लिए 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान भारतीय साहित्य में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। पुरस्कार समारोह नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जहां उन्होंने अपने साहित्यिक सफर और जीवन के अनुभवों को साझा किया।

आर. वैरामुथु तमिल साहित्य के ऐसे रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, उपन्यास, निबंध और फिल्मी गीतों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्हें तमिल कविता के लिए ज्ञानपीठ सम्मान पाने वाले पहले कवि और ज्ञानपीठ प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार बनने का गौरव हासिल हुआ है।

चार दशक से अधिक लंबे रचनात्मक सफर में वैरामुथु ने 7,500 से अधिक गीत और अनेक साहित्यिक कृतियां लिखी हैं। उन्हें इससे पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म श्री, पद्म भूषण तथा सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

पुरस्कार ग्रहण करते हुए वैरामुथु ने कहा कि उनकी शिक्षा ने उन्हें अक्षरों का ज्ञान दिया, जबकि जीवन के संघर्षों और गरीबी ने उन्हें साहित्य का वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने इस सम्मान को तमिल भाषा और भारतीय साहित्य के लिए गर्व का क्षण बताया।

ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान माना जाता है, जो भारतीय भाषाओं के उन रचनाकारों को दिया जाता है जिन्होंने साहित्य के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। वैरामुथु को मिला यह सम्मान तमिल साहित्य की समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है।

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