भारत में मानसून आते ही जिस समस्या की शुरुआत सबसे पहले होती है, वह है जलभराव। भारत में हर साल जलभराव की समस्या अब आम हो गई है, सड़कों से लेकर घरों तक यह देखने को मिलता है। मानसून के दौरान जलभराव से गुजरना कई इलाकों में लोगों की आम दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है।
हर साल एक ही तरह की समस्या और घटनाएं देश में कमियों और कमजोरियां पर बड़े सवाल खड़े करती है। मानसून के दौरान कई समस्याएं सिस्टम और कमजोर तंत्र की पोल खोल देती हैं।
बड़े शहरों में बुरे हाल
देश के बड़े शहर मानसून की हल्की बारिश भी सहन नहीं कर पाते हैं। नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर की सड़कें कुछ ही घंटों की बारिश में तालाब में तब्दील हो जाती हैं। इतना ही नहीं हल्की बारिश या मानसून की पहली बारिश में सड़कें तक धंस जाती हैं। घंटों इन बड़ें शहरों में जाम लग जाता है।
भारत में मानसून आते ही जिस समस्या की शुरुआत सबसे पहले होती है, वह है जलभराव। भारत में हर साल जलभराव की समस्या अब आम हो गई है, सड़कों से लेकर घरों तक यह देखने को मिलता है। मानसून के दौरान जलभराव से गुजरना कई इलाकों में लोगों की आम दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है।
हर साल एक ही तरह की समस्या और घटनाएं देश में कमियों और कमजोरियां पर बड़े सवाल खड़े करती है। मानसून के दौरान कई समस्याएं सिस्टम और कमजोर तंत्र की पोल खोल देती हैं।
बड़े शहरों में बुरे हाल
देश के बड़े शहर मानसून की हल्की बारिश भी सहन नहीं कर पाते हैं। नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर की सड़कें कुछ ही घंटों की बारिश में तालाब में तब्दील हो जाती हैं। इतना ही नहीं हल्की बारिश या मानसून की पहली बारिश में सड़कें तक धंस जाती हैं। घंटों इन बड़ें शहरों में जाम लग जाता है।
हाईकोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी
मुंबई शहर को जलभराव से मुक्त रखने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम के अधिकारियों पर ही नहीं है। मुंबई में जलभराव को लेकर बीएमसी की आलोचना के बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की समीक्षा करते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि मुंबई में बाढ़ के लिए नागरिक भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने अतिक्रमण और जल निकासी का हवाला देते हुए का कि लोगों ने अपनी ही मातृभूमि को लूटा है, इसलिए शहर में जलभराव केवल नगर निकाय की समस्या नहीं है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

