सिंहासन पर बैठे दिखेंगे छत्रपति शिवाजी, आगरा के कोठी मीना बाजार ग्राउंड में लगेगी विशाल प्रतिमा; दूर से ही आएगी नजर
कोठी मीना बाजार में बनाए जाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक में उनकी भव्य प्रतिमा बनाई जाएगी। यहां शिवाजी महाराज की 100 फीट ऊंची अश्वारोही प्रतिमा बनाने की योजना थी, लेकिन इसमें बदलाव किया गया है। स्मारक में अब छत्रपति शिवाजी की सिंहासनारूढ़ मुद्रा में प्रतिमा बनाई जाएगी। कोठी के पास टीले पर करीब 45 फीट ऊंची प्रतिमा बनेगी।
टीला करीब 35 फीट ऊंचा है। आसपास कोई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग नहीं होने से प्रतिमा दूर से ही नजर आएगी। महाराष्ट्र सरकार आगरा किला में चार वर्ष से 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मना रही है। वर्ष 2025 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जयंती समारोह में आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने की घोषणा की थी।
इसके बाद 21 मार्च, 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने स्मारक का शासनादेश जारी कर दिय था। इससे पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय कोठी मीना बाजार को शिवाजी के स्मारक के रूप में विकसित कराने को प्रयास कर रहे थे। उप्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक को बनाएंगी।
इसके लिए यहां टीले की 2946 वर्ग मीटर भूमि ली जा रही है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि कोठी मीना बाजार को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां साउंड एंड लाइट शो, डाक्यूमेंट्री आदि का प्रदर्शन किया जाएगा। टीले पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा बनवाई जाएगी।
101 दिन आगरा में रहे थे शिवाजी
इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने अपनी पुस्तक ‘औरंगजेब’ में लिखा है कि राजा जयसिंह से पुरंदर की संधि के बाद शिवाजी 11 मई, 1666 को आगरा पहुंचे। अगले दिन आगरा किला के दीवान-ए-खास में औरंगजेब के दरबार में शिवाजी गए। यथोचित सम्मान नहीं मिलने पर वो नाराजगी जताकर लौट आए।
औरंगजेब ने शिवाजी को राजा जयसिंह के बेटे राम सिंह की छावनी के निकट सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में नजरबंद करने का आदेश किया। 16 मई, 1666 को शिवाजी को रदंदाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। बीमारी का बहाना बनाकर शिवाजी ने गरीबों को फल बांटना शुरू कर दिया।
18 अगस्त को उन्हें राम सिंह की छावनी के निकट स्थित फिदाई हुसैन की शहर के बाहर टीले पर स्थित हवेली में रखने का आदेश औरंगजेब ने किया। 19 अगस्त, 1666 को शिवाजी अपने पुत्र संभाजी के साथ फलों व मिठाइयों की टोकरी में बैठकर निकल गए।
उनकी जगह हीरोजी फरजंद पलंग पर लेटे रहे थे। शिवाजी के बचकर निकलने की जानकारी औरंगजेब व अन्य को 20 अगस्त, 1666 को मिल सकी थी। शिवाजी आगरा में 101 दिन रहे थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

