कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवाणी के नामांकन पत्र की जांच में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस इस लड़ाई को अपने बूते ही आगे ले जाना चाहती है। पार्टी को इस बात का आभास है कि इस लड़ाई में उसे सहयोगी दलों का साथ मिलना मुश्किल है। सहयोगी दलों का साथ मिला तो कांग्रेस इस प्रकरण में लंबी लड़ाई लड़ने के मूड में है।
पार्टी के कई नेता इसे महज निर्वाचन आयोग तक सीमित नहीं रखना चाहते हैं, बल्कि इसमें गठबंधन के सहयोगी दलों पर भी उनका निशाना है।
यही कारण है कि बुधवार को झारखंड विधानसभा में जो घटनाक्रम हुआ उसके पीछे गठबंधन के दलों पर भी नेता मुखर हो रहे हैं।
लंबी लड़ाई के लिए तैयार कांग्रेस
कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी सहयोगियों का साथ नहीं मिलना है। एक बड़ा खतरा यह भी है कि लड़ाई में कांग्रेस खुद ही अलग-थलग न पड़ जाए।
इस मुद्दे पर भी सहयोगी जुटते नहीं दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली दौरे के क्रम में गठबंधन के साथियों से मिल रहे असहयोग की चर्चा पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से करें।
ऐसे भी झारखंड में राज्यसभा चुनाव में खरगे की पसंद के उम्मीदवार को पार्टी ने मौका दिया था और यह बात झारखंड मुक्ति मोर्चा से लेकर सभी साथी दलों के संज्ञान में है।
कांग्रेस के साथ सभी दलों ने अलग-अलग समय में इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश की है, लेकिन अभी पार्टी अलग-थलग पड़ गई है। कांग्रेस को अकेले ही मोर्चा संभालना पड़ रहा है। ऐसे में लंबी लड़ाई मुश्किल लग रही है।


