गाजीपुर में फर्जी दस्तावेजों वाली निविदा की जांच में लापरवाही पर दो दारोगा निलंबित

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 सरकारी निविदा प्रक्रिया में सात निजी फर्मों द्वारा कूटरचित वित्तीय दस्तावेजों का उपयोग किए जाने के मामले की विवेचना में घोर लापरवाही बरतने पर शहर कोतवाली के दो उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण ने लंबित एवं संवेदनशील मामलों की समीक्षा के दौरान अनियमितताएं मिलने पर यह कार्रवाई कराई। साथ ही मामले की निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के लिए जांच शहर क्षेत्राधिकारी को स्थानांतरित कर 30 दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामला 25 फरवरी 2025 को नगर खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर कोतवाली में दर्ज हुआ था। तकनीकी प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर आयोजित निविदा प्रक्रिया में 176 फर्मों ने आवेदन किया था। बैंकों से वित्तीय दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान सात निजी फर्मों के दस्तावेज कूटरचित पाए गए।

इनमें अलमदीना फाउंडेशन, एएस इन्फ्राटेक लखनऊ, बिगजिया मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, श्री हरिओम इन्फोटेक, पृथ्वी प्रोटेक्टिव सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड तथा वंशिखा एचआर सर्विस लखनऊ शामिल हैं। जांच में इनके बैंक अभिलेख, डिमांड ड्राफ्ट, थर्ड पार्टी डिपाजिट, ग्राहक पहचान संख्या अथवा अन्य वित्तीय दस्तावेज असत्य या उपलब्ध नहीं पाए गए।

पुलिस उपमहानिरीक्षक की समीक्षा में सामने आया कि विवेचकों ने फर्जी दस्तावेजों जैसे गंभीर आरोपों का समुचित परीक्षण नहीं किया। बिना ठोस आधार सातों फर्मों को विवेचना से अलग कर दिया गया और प्रथम दृष्टया अपराध स्पष्ट होने के बावजूद जल्दबाजी में अंतिम रिपोर्ट लगाकर प्रकरण समाप्त करने का प्रयास किया गया।

इसे विवेचना को जानबूझकर कमजोर करने और कर्तव्य में गंभीर लापरवाही माना गया। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होने पर पुलिस अधीक्षक ने उपनिरीक्षक रोहित कुमार तथा उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीआइजी ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील मामलों की विवेचना की नियमित समीक्षा आगे भी जारी रहेगी तथा विवेचना में शिथिलता बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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