OTT से फिल्म सतलुज हटाए जाने का SGPC ने किया विरोध, धामी बोले- इतिहास की सच्चाई नहीं दबेगी, तुरंत हटे रोक

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फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में ओटीटी मंच से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म को हटाए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सिखों पर हुए कथित अत्याचारों और मानवाधिकारों से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को किसी भी तरह दबाया नहीं जा सकता।

धामी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को जानने और समझने का अधिकार है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। उनके अनुसार, 1984 के बाद पंजाब में हजारों निर्दोष सिख युवाओं के साथ कथित ज्यादतियां हुईं और उन्हें लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किए जाने के आरोप लगे।उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने ऐसे मामलों को दुनिया के सामने लाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

परिवारों में जगी थी न्याय की उम्मीद

उन्होंने कहा कि खालड़ा के प्रयासों से अनेक परिवारों में न्याय की उम्मीद जगी, लेकिन बाद में उन्हें भी अपनी जान गंवानी पड़ी। धामी के अनुसार, फिल्म ‘सतलुज’ इतिहास, मानवाधिकारों और सामाजिक तथ्यों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय को सामने लाने का प्रयास करती है। ऐसे में इस तरह की फिल्म पर रोक लगाने के बजाय लोगों को इसे देखने और इसके तथ्यों पर स्वयं विचार करने का अवसर मिलना चाहिए।एसजीपीसी अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि जिन मामलों में युवाओं को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किए जाने के आरोप लगे थे, उनमें अब विभिन्न अदालतें संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ फैसले सुना रही हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में दर्ज तथ्यों को किसी भी प्रकार से छिपाया नहीं जा सकता और न ही उन्हें हमेशा के लिए दबाया जा सकता है।

सत्य और इतिहास पर रोक अनुचित

धामी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐतिहासिक घटनाओं और विचारों पर आधारित रचनाओं पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाई गई हर प्रकार की रोक तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि समाज को इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को समझने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा का बलिदान मानवाधिकारों की रक्षा, न्याय की लड़ाई और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनके अनुसार, इतिहास में दर्ज सच्चाई को दबाने के प्रयास कभी सफल नहीं हो सकते। वहीं, फिल्म को लेकर जारी विवाद के बीच विभिन्न पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं और यह मामला अब सामाजिक तथा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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