गोस्वामी श्रृंखला 4: नगर निगम सिंगरौली में जब पद था ही नहीं? तो गोस्वामी की पदोन्नति कैसे?

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सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली में पदस्थ अधिकारी प्रवीण कुमार गोस्वामी की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गोस्वामी श्रृंखला के चौथे भाग में सामने आए दस्तावेजों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उनकी उपयंत्री पद पर हुई विभागीय पदोन्नति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए जा रहे हैं। यदि उपलब्ध अभिलेख सही हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक त्रुटि तक सीमित नहीं बल्कि शासन के निर्धारित नियमों एवं पदोन्नति प्रक्रिया के पालन पर भी सवाल खड़े करता है।

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार आयुक्त, नगर पालिका निगम सिंगरौली के आदेश क्रमांक 13302/स्था./2013 दिनांक 17 जनवरी 2013 के तहत तत्कालीन उपायुक्त सी.पी. पाण्डेय की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति का गठन किया गया था। समिति की बैठक 28 फरवरी 2013 को आयोजित हुई, जिसके निर्णय के आधार पर कार्यालयीन आदेश क्रमांक 15071-15072/स्था./2013 दिनांक 7 मार्च 2013 द्वारा प्रवीण कुमार गोस्वामी, जो उस समय समयपाल के पद पर कार्यरत थे, को उपयंत्री पद पर पदोन्नत किया गया।

कार्यवृत्त और नियमों में दिखाई दे रहा विरोधाभास

सूत्रों से प्राप्त विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के कार्यवृत्त दिनांक 28 फरवरी 2013 का अध्ययन करने पर यह उल्लेख मिलता है कि उस समय उपयंत्री के दो पद रिक्त बताए गए थे। हालांकि, इसी कार्यवृत्त के अन्य बिंदुओं तथा उपलब्ध अभिलेखों से यह प्रश्न भी सामने आता है कि क्या वास्तव में विभागीय पदोन्नति के लिए कोई पद रिक्त था?

मध्य प्रदेश नगरपालिका निगम (अधिकारियों तथा सेवकों की नियुक्ति तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2000 की अनुसूची-दो के अनुक्रमांक-16 के अनुसार उपयंत्री पद पर विभागीय पदोन्नति, मध्य प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप ही की जानी चाहिए।

क्या कहते हैं नियम?

मध्य प्रदेश राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक-264 दिनांक 7 जून 2007 के अनुसार—

  • उपयंत्री (सिविल) पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्था से सिविल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा अथवा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री अनिवार्य है।
  • उपयंत्री (विद्युत एवं यांत्रिकी) पद के लिए विद्युत एवं यांत्रिकी इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा अथवा संबंधित विषय में डिग्री आवश्यक है।
  • स्वीकृत पदों में 95 प्रतिशत पद सीधी भर्ती तथा 5 प्रतिशत पद विभागीय पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान है।

केवल एक पद पदोन्नति के लिए पात्र होने का दावा

विश्वसनीय सूत्रों एवं उपलब्ध पुराने अभिलेखों के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति के कार्यवृत्त के बिंदु क्रमांक-03 में उल्लेख है कि संशोधित नियमों के अनुसार नगर पालिका निगम सिंगरौली में उपयंत्री के कुल 16 स्वीकृत पद थे। यदि 5 प्रतिशत पदोन्नति का नियम लागू किया जाए, तो विभागीय पदोन्नति के लिए केवल एक पद ही निर्धारित होता है।

आरक्षण रोस्टर रजिस्टर से भी उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार निगम द्वारा संधारित आरक्षण रोस्टर रजिस्टर में दर्ज जानकारी बताती है कि 28 फरवरी 2013 की स्थिति में पदोन्नति कोटे के विरुद्ध दो अधिकारी पहले से कार्यरत थे। इनमें रामनरेश शाह (विद्युत एवं यांत्रिकी) तथा पवन कुमार सिंह (सिविल) उपयंत्री पद पर पदस्थ थे।

यदि यह अभिलेख सही हैं, तो उस समय विभागीय पदोन्नति के लिए कोई पद रिक्त ही नहीं था। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि प्रवीण कुमार गोस्वामी को किस आधार पर उपयंत्री पद पर पदोन्नति प्रदान की गई।

जांच की उठ रही मांग

उपलब्ध जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर सूत्र ये कह रहें हैं कि विभागीय पदोन्नति समिति ने पद उपलब्ध न होने के बावजूद प्रवीण कुमार गोस्वामी को पदोन्नति का लाभ दिया, जो शासन के नियमों एवं दिशा-निर्देशों के विपरीत हो सकता है। साथ ही, यह भी मांग की जा रही है कि प्रवीण कुमार गोस्वामी की समयपाल पद पर हुई अनुकंपा नियुक्ति तथा बाद में उपयंत्री पद पर दी गई विभागीय पदोन्नति की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-14 के अंतर्गत कराई जाए, ताकि पूरे मामले के तथ्य स्पष्ट हो सकें।

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