मानसून के दो रंग: बादलों की बेरुखी, कहीं थमी रफ्तार तो कहीं तरस रहे खेत, अगले चार दिनों में राहत की उम्मीद

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देश में इस समय मानसून के दो बिल्कुल अलग और विरोधाभासी चेहरे देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां मायानगरी मुंबई, गुजरात और केरलम जैसे राज्य भारी और “रिकॉर्डतोड़” बारिश से बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बरखा रानी की बेरुखी ने किसानों और आम जनमानस को निराश किया है।

मौसम विभाग (आइएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, देश के बड़े हिस्से में मानसून की चाल सुस्त है, जिससे खेती-किसानी पर संकट मंडराने लगा है।

सूखे की कगार पर उत्तर और मध्य भारत: एक जून से चार जुलाई के बीच के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में सामान्य तौर पर 118 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन यह 43 प्रतिशत कम यानी महज 67 मिमी ही दर्ज की गई है।

कमोबेश यही स्थिति बिहार की भी है, जहां सामान्य वर्षा 207 मिमी की जगह अब तक सिर्फ 97.8 मिमी हुई है, जो सामान्य से 53 प्रतिशत कम है। पंजाब और हरियाणा में भी क्रमशः 27 और 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में भी सामान्य से 40 प्रतिशत कम (136.4 मिमी) पानी गिरा है। यह बेरुखी खेतों में दरारें ला रही है और धान की रोपाई के लिए पानी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। इसके विपरीत, पश्चिमी और दक्षिणी भारत में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है।

मुंबई ब्यूरो के अनुसार, देश की आर्थिक राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने मायानगरी की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

मुंबई, ठाणे और पालघर में “रेड अलर्ट” जारी किया गया है और निचले इलाकों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है।

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें 15 से 20 मिनट की देरी से चल रही हैं। सुरक्षा के मद्देनजर शनिवार को स्कूलों और कालेजों के दोपहर के सत्र बंद रखे गए। सिर्फ 12 घंटों में ही कई इलाकों में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी थी।

दृश्यता कम होने और तेज हवाओं के चलते मुंबई हवाई अड्डे पर कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ को डाइवर्ट करना पड़ा है। विभिन्न इलाकों से पेड़ गिरने और शार्ट सर्किट की घटनाएं भी सामने आई हैं। राज्य सरकार ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा है।

हालांकि, मौसम विभाग ने एक राहत भरी खबर भी दी है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में एक “सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र” बना हुआ है, जिसके प्रभाव से अगले चार-पांच दिनों के दौरान देश के मध्य भागों में मानसून सक्रिय चरण में रहेगा।

आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले चार दिनों में गुजरात, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तरी अरब सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि आगामी दिनों में बादलों की यह बेरुखी खत्म होगी और देश के सूखे खेतों को भी राहत मिलेगी।

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