बीते वर्ष बादल फटने से जिले के जौध गांव में 5 लोगों की जान चली गई। एक दर्जन घर मलवे में जमींदोज हो गए। इन घरों में रहने वाले करीब 30 लोग बेघर हो गए। अस्थायी रूप से बेघर लोगों ने गांव से दूर जुथाना और घाटी में अस्थायी घर बनाए। इस उम्मीद में कि दोबारा घर बसाएंगे। लेकिन हकीकत यह है कि 11 महीनों के बाद बसने के बजाए ये लोग दोबारा बेघर हो गए। कारण है बरसात और प्रशासनिक अनदेखी।
पक्के घर नहीं है इसलिए बरसात होने पर वे रह नहीं सकते। छह महीने पहले उपराज्यपाल की मौजूदगी में पक्के घर बनाने का नींव जरूर रखा गया। यह कार्य नींव से आगे नहीं बढ़ पाया। लोगों से वादा किया गया कि बरसात से पहले लोगों को पक्के घर बनाकर दिए जाएंगे। लेकिन अब तक इस गांव तो क्या पूरे जिले में 350 लोगों के बनने वाले घरों में एक घर भी प्रशासन नहीं बनवा पाया।जोकि 34 करोड़ की लागत से तीन बेडरूम वाले घरों को बनाने का खर्च एक एनजीओ हाई-रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (एसआरडीएस इंडिया) उठाने वाली थी। गांव के लोगों का कहना है कि 11 महीनों से घरों का इंतजार कर रहे हैं। अस्थायी ढांचे बनाकर दोबारा वहां रह रहने लगे थे। सोचा था बरसात के वक्त पक्के घर बन जाएंगे।
लेकिन बारिश शुरू हो गई है। वे लोग वापस आ गए हैं। बता दें कि पिछले साल बादल फटने से जौध गांव में 5 लोगों की मौत हो गई थी। बादल फटने के बाद मुश्किल से बाकी के लोगों को बचाया। कई महीनों से लोग मलवा हटाने में लगे हुए हैं। मलवा हटाकर कुछ ने दोबारा रहना शुरू किया।
लेकिन बरसात ने उन्हें फिर वहां से भागने से मजबूर कर दिया है। बता दें कि प्रदेश में मानसून दस्तक दे चुका है। बादल फटने की घटनाएं अब जम्मू कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में आम हो चुकी है। ऐसे में पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को डर सता रहा है कि बादल फटने पर होगा क्या।
जौध गांव के रहने वाले शामसुदीन इस समय घाटी गांव में परिवार के साथ रहता है। जिसका कहना है कि बरसात होती है तो डर लगता है। शेड डालकर रह रहे हैं। पानी का एक तेज बहाव या फिर एक बार फिर बादल फटने पर जिंदा नहीं बच पाएंगे। पिछली बार तो किसी तरह बच गए। इस बार नहीं बच पाएंगे। बादल गरजता है तो बच्चे डर जाते हैं। इसलिए वहां से वापस आना पड़ा।
इस समय जुथाना में रहने वाला बरकत अली भी अपना परिवार लेकर दो दिन पहले ही लौटा है। बरकत का कहना है कि बरसात होते ही बच्चे डरने लगे। वे पिछले का मंजर नहीं भूल पाए हैं। प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि बरसात आने से पहले घर बनाकर देंगे। बरसात शुरू हो गई। लेकिन घर नहीं बने हैं। इस हालत में जाएं कहां। अब खुद ही पैसे खर्च करे अस्थायी ढांचा खड़ा किया है।
9 दिसंबर 2025 को कठुआ स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस मौके पर मुख्य अतिथि थे। जिला प्रशासन ने बादल फटने और बाढ़ आने से 350 परिवारों को घर बनाकर देने की घोषणा की। लेकिन लगभग एक वर्ष के बाद भी जिला प्रशासन एनजीओ के साथ मिलकर घरों को बनाने का काम शुरू नहीं करवा सका।
जबकि सैकड़ों परिवार इस समय बारिश की मार झेल रहे हैं। जो बचने के लिए दरबदर हो रहे हैं। लेकिन इनका सुनने वाला कोई नहीं। अहम बात तो यह है कि प्रशासन की तरफ से बरसात के मौसम को लेकर मदद के लिए कुछ नंबर तो जारी कर दिए। लेकिन जो पहले से इसके पीड़ित हैं। उन तक प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। जिसने लोगों को कहा हो कि बरसात होने पर उन्हें कोई दिक्कत तो नहीं है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

