भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है।
आंकड़े बताते हैं कि जिले की 230 पंचायतों के 926 वार्डों में नल से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद है। ऐसे में हजारों ग्रामीणों को फिर से चापाकल और अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
2,805 वार्डों में नल-जल योजना संचालित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में पंचायती राज विभाग की देखरेख में कुल 2,805 वार्डों में नल-जल योजना संचालित की जा रही थी। बाद में इस योजना को पीएचईडी विभाग को सौंप दिया गया।
आंकड़े बताते हैं कि इनमें से 926 वार्डों में विभिन्न तकनीकी कारणों से जलापूर्ति बाधित है। यानी करीब 30 से 31 प्रतिशत योजनाएं बंद हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत योजनाएं ही वर्तमान में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
अधिकांश स्थानों पर मोटर खराब
विभागीय पड़ताल में सामने आया है कि अधिकांश स्थानों पर मोटर खराब होने, विद्युत स्विच में गड़बड़ी तथा अन्य तकनीकी कारणों से योजनाएं बंद पड़ी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद खराब उपकरणों की मरम्मत समय पर नहीं हो रही है। कई जगहों पर सप्ताहों से जलापूर्ति ठप रहने के कारण लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
हर प्रखंड में एक जैसी समस्या
आंकड़ों के अनुसार जिले का कोई भी प्रखंड ऐसा नहीं है, जहां सभी वार्डों में नल-जल योजना सुचारु रूप से चल रही हो। प्रत्येक प्रखंड में तकनीकी खराबी के कारण जलापूर्ति प्रभावित है।
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे विजयीपुर प्रखंड की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां आधे से अधिक वार्डों में नल से पानी की आपूर्ति बंद है। वहीं कुचायकोट प्रखंड में करीब 30 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति ठप है। अन्य प्रखंडों की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं बताई जा रही है।


