काशी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में इस वर्ष जून महीने में मानसून की भारी बेरुखी देखने को मिली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक से 30 जून तक वाराणसी में सामान्य के मुकाबले बेहद कम बारिश दर्ज की गई है।
बीते जून माह में ही मानसून की आमद बीस जून को मानी जाती है। लेकिन इस पूरे महीने में जहां वाराणसी में सामान्यतः 95.1 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, वहीं केवल 6.9 मिमी बारिश ही रिकार्ड की गई, जो कि सामान्य से 93 प्रतिशत तक कम है। मानसून भी इतना विलंबित रहा कि माह के अंतिम दिन 30 जून को नौ दिन विलंब से पहुंचा तो सही लेकिन बादल भी बारिश नहीं करा सके। हालांकि मौसम विभाग ने एक जुलाई से सात जुलाई तक पहले सप्ताह के लिए राहत भरा पूर्वानुमान जारी किया है। लेकिन यह भी पूरी तरह से लोकल हीटिंग पर ही निर्भर होने से माना जा रहा है कि बारिश की संभावना पर असमंजस के बादल ही रहेंगे। मानसून के 30 जून को आने के बाद भी बारिश का इंतजार हो रहा है।
आगामी दिनों में तापमान में हल्की गिरावट और बारिश की संभावना जताई गई है। एक से पांच जुलाई तक आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। इस दौरान बारिश या गरज-चमक के साथ बारिश देखने को मिल सकती है। पांच जुलाई तक अधिकतम तापमान गिरकर 35 डिग्री सेल्सियस तक आने की उम्मीद है। हालांकि अब हीट वेव की सक्रियता नही होनी है।
मौसम विभाग ने बताया है कि छह जुलाई को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और एक या दो बार बौछारें पड़ने की संभावना है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि जुलाई की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में मानसूनी हवाएं एक बार फिर सक्रिय होंगी, जिससे कम वर्षा के इस बड़े अंतर की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से निजात मिलेगी।
वाराणसी में मानसून की बेरुखी के बावजूद जुलाई की शुरुआत में बारिश की संभावनाएं लोगों के लिए राहत का संकेत हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम में सुधार की उम्मीद है, जिससे गर्मी से राहत मिल सकेगी। हालांकि अलनीनो का असर होने से इस बार बारिश की संभावना में कमी का भी संकेत मौसम विभाग ने दिया है।


