आज के समय में सिनेमा जगत में बिकिनी और बोल्ड सीन्स का मामला काफी कॉमन हो गया है। खासतौर पर ओटीटी के आने के बाद इसमें काफी तेजी से इजाफा देखने को मिला है। लेकिन एक वक्त हुआ करता था, जब बहुत कम एक्ट्रेसेज ही बिकिनी के पहनने के लिए राजी होती थीं।
ऐसे ही एक अदाकारा अभिनेता सैफ अली खान की मां और वेटरन अभिनेत्री शर्मिला टैगोर रही हैं। जिन्होंने 59 साल पहले एक बिकिनी फोटोशूट करा के इंडस्ट्री में सनसनी मचा दी थी। इस मामले को लेकर शर्मिला ने खुलकर बात की है-
शर्मिला की बिकिनी पर छिड़ा था विवाद
पिछली सदी के छठें दशक के दौरान एक लोकप्रिय फिल्म मैगजीन के कवर पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की बिकिनी तस्वीर प्रकाशित हुई थी, जिसने पूरे देश में बड़ी बहस छेड़ दी। इसके बाद साल 1967 में फिल्म एन इवनिंग इन पेरिस में उन्होंने बिकिनी पहनकर अभिनय किया।
उस दौर में किसी मुख्यधारा की हिंदी फिल्म की शीर्ष अभिनेत्री का इस तरह बिकिनी में दिखाई देना अभूतपूर्व माना गया। अब इस फोटोशूट को लेकर शर्मिला ने बताया कि उस वक्त मैंने सोचा था-
बिकिनी पहनने में क्या दिक्कत है। लेकिन जब यह तस्वीर सामने आई, तो बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उस दौर में बिकिनी पहनना किसी बम फटने जैसा था। सचमुच ऐसा लगा जैसे कोई बिकिनी बम फट गया हो। फिर मैं बहुत निराश होकर निर्देशक शक्ति सामंथा के पास गई।
मैंने कहा कि अब मैं यह सब नहीं करूंगी। लोगों को लगा कि मैंने यह सब जानबूझकर प्रचार पाने और फिल्म की व्यावसायिक सफलता के लिए किया है। मैंने सहज रूप से यह किया था। शक्ति जी ने मुझे लंबा-चौड़ा भाषण दिया कि अगर किसी अभिनेत्री को गंभीरता से लिया जाना है, तो उसे कैसे व्यवहार करना चाहिए।
शर्मिला ने शुरू किया ट्रेंड
उस वक्त बिकिनी पहनने को लेकर शर्मिला टैगोर की काफी आलोचना बेशक हुई, लेकिन सही मायनो में देखा जाए तो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बिकिनी ट्रेंड शर्मिला ने शुरू किया, जिसे आज कृति सेनन जैसी कई अदाकाराएं फिल्मों में फॉलो कर रही हैं। हाल ही में कृति को फिल्म कॉकटेल 2 में पहली बार बिकिनी पहने हुए देखा गया है।


