राजौरी जिले की मंजाकोट तहसील के गंभीर मुगला क्षेत्र से सटे डोरी माल के घने जंगलों में आतंकियों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा व्यापक संयुक्त अभियान लगातार चौथे दिन भी जारी रहा।
अभियान के दौरान जंगल के भीतर खून के निशान मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को यह महत्वपूर्ण संकेत मिला है कि हालिया मुठभेड़ और गोलीबारी में एक या अधिक आतंकी घायल हुए हो सकते हैं। इसी आधार पर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तलाशी अभियान को और अधिक तेज कर दिया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सोमवार को सुरक्षा बलों को जंगल के अंदर से आतंकियों के उपयोग का कुछ सामान बरामद हुआ था। इसके बाद मंगलवार को तलाशी के दौरान कई स्थानों पर खून के निशान भी मिले। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि मुठभेड़ के दौरान घायल हुए आतंकी अभी भी जंगल के किसी हिस्से में छिपे हो सकते हैं और बच निकलने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन खून के निशानों ने सुरक्षा एजेंसियों को अभियान को और अधिक सघन बनाने के लिए प्रेरित किया है।
हेलीकॉप्टर से दुर्गम इलाकों में उतारे कमांडो
सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कई स्तरों पर घेर रखा है। घने जंगलों, पहाड़ी ढलानों और प्राकृतिक गुफाओं वाले इस क्षेत्र में आतंकियों की तलाश आसान नहीं है। यही कारण है कि सेना ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है तथा विशेष प्रशिक्षित कमांडो दस्तों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार सेना के विशेष कमांडो को हेलीकॉप्टर की मदद से दुर्गम इलाकों में उतारा गया है ताकि जंगल के उन हिस्सों तक पहुंच बनाई जा सके जहां सामान्य रूप से पहुंचना कठिन है।
अभियान में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। सेना के हेलीकॉप्टर लगातार क्षेत्र की हवाई निगरानी कर रहे हैं, जबकि ड्रोन कैमरों के जरिए जंगल के भीतर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा खोजी कुत्तों की विशेष टीमों को भी तैनात किया गया है, जो आतंकियों की मौजूदगी और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने में सुरक्षा बलों की मदद कर रही हैं।
मंगलवार को भी सुरक्षा बलों ने जंगल के कई हिस्सों में सघन तलाशी अभियान चलाया। कुछ स्थानों पर संदिग्ध हलचल की सूचना मिलने के बाद जवानों ने एहतियातन गोलीबारी भी की, लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाबी फायरिंग नहीं हुई। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही हैं कि आतंकी अभी भी इलाके में छिपे हुए हैं और मौके की तलाश में हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत की गई
स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने ग्रामीणों को जंगलों की ओर न जाने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या सेना को देने के लिए कहा है। अभियान के चलते कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है तथा आने-जाने वाले मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक पूरे क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता। पिछले कुछ वर्षों में राजौरी-पुंछ के पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकियों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा बल किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं। इसी कारण जंगल के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है और हर संभावित ठिकाने की गहन जांच की जा रही है।
डोरी माल और गंभीर मुगला के जंगलों में जारी यह अभियान फिलहाल क्षेत्र का सबसे बड़ा सुरक्षा अभियान माना जा रहा है। खून के निशान मिलने के बाद सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि जल्द ही आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है। वहीं पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और अभियान की हर गतिविधि पर वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं।


