प्रतिभा और मेहनत का शानदार उदाहरण पेश करते हुए मोगा स्थित आईएसएफ कॉलेज ऑफ फार्मेसी की बी. फार्म अंतिम वर्ष की छात्रा आकांक्षा पटेल ने अपनी कला से राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। आकांक्षा ने सबसे लंबे कपड़े पर मेहंदी की आकर्षक डिजाइन तैयार कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें पदक और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
संस्था के निदेशक डॉ. जी.डी. गुप्ता ने बताया कि आकांक्षा पटेल पहले भी राष्ट्रीय स्तर की कई मेहंदी प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल कर चुकी हैं। मेहंदी कला के क्षेत्र में उनकी लगातार उपलब्धियों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। अब उन्होंने अपनी इस नई उपलब्धि से संस्थान और क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है।
जानकारी के अनुसार आकांक्षा पटेल ने 39.1 फीट लंबे और तीन फीट चौड़े कपड़े पर लगातार 13 घंटे 51 मिनट तक मेहंदी से डिजाइन तैयार की।
मेहंदी से दिखाई भारतीय सांस्कृतिक विरासत
इस दौरान उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अपनी कला के माध्यम से प्रस्तुत किया। कपड़े पर विभिन्न पारंपरिक नृत्य शैलियों की सुंदर मुद्राएं उकेरी गईं, जिनमें घूमर, गरबा, कथकली सहित अन्य लोक और शास्त्रीय नृत्य रूपों की झलक दिखाई गई।
इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में 46 मेहंदी कोन का उपयोग किया गया। लंबे समय तक लगातार काम करने के बावजूद आकांक्षा ने अपनी कला की गुणवत्ता और बारीकी को बनाए रखा। उनकी इसी उत्कृष्ट प्रस्तुति को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार किया।
रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद आकांक्षा पटेल को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से पदक और प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे शिक्षण संस्थान के लिए भी गर्व का विषय बनी है।
निरंतर प्रयास से मिली पहचान
छात्रा की इस सफलता पर संस्थान के चेयरमैन प्रवीण गर्ग, सचिव इंजीनियर जनेश गर्ग, डॉ. मुस्कान गर्ग, निदेशक डॉ. जी.डी. गुप्ता, प्राचार्य डॉ. आर.के. नारंग तथा सभी शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि आकांक्षा ने अपनी लगन, मेहनत और रचनात्मक सोच के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
संस्थान के पदाधिकारियों ने आकांक्षा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वह आने वाले समय में भी अपनी प्रतिभा से नई ऊंचाइयों को छुएंगी और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान और देश का नाम रोशन करेंगी। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण और निरंतर अभ्यास के बल पर किसी भी क्षेत्र में नई पहचान बनाई जा सकती है।


