सोहना नागरिक अस्पताल का शवदाह गृह वर्षों से जर्जर स्थिति में है। इस भवन में कोई सुविधा नहीं है, जिससे चिकित्सक और अन्य कर्मचारी यहां प्रवेश करने में भी डरते हैं। विभाग ने इस जर्जर शव गृह का पुनर्निर्माण नहीं कराया है और न ही नए भवन के निर्माण के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। जिला चिकित्सा अधिकारी ने इसके जल्द पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन वास्तविकता में निर्माण प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
सोहना का शवदाह गृह लगभग चार दशक पुराना है और अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और कई जगह से छत गिरने का खतरा है। जर्जर भवन चिकित्सकों के लिए जान का जोखिम बना हुआ है।
इसके अलावा, मृतकों के स्वजन को पोस्टमार्टम के लिए गुरुग्राम जाना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने इस समस्या के बारे में जिला और प्रदेश के अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन जर्जर भवन के पुनर्निर्माण की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। फिलहाल, कोविड सेंटर में अस्थाई रूप से शवदाह गृह का संचालन किया जा रहा है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि 50 बेड के नए भवन के निर्माण के दौरान शवदाह गृह का निर्माण होगा, लेकिन नए भवन का निर्माण कब शुरू होगा, इसकी कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। कई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अस्पताल के अपग्रेडेशन की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
इस बारे में एसएमओ डॉ. रणविजय सिंह का कहना है कि वास्तव में शवदाह गृह जर्जर हो चुका है। पहले इसके पुनर्निर्माण के लिए एस्टीमेट तैयार किया था लेकिन अब जल्द नए भवन का निर्माण होगा। नए भवन में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होगी।


