भारत अपने बासमती चावल को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। भारत दुनिया के कई देशों में बासमती चावल का निर्यात (Basmati Export) भी करता है। अब देश को अफगानिस्तान के रूप में एक नया बड़ा खरीदार मिलने की संभावना बन रही है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आयोजन में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच शुरुआती बातचीत भी शुरू हो गई है। अगर ये डील सफल हुई तो पाकिस्तान को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पाकिस्तान को होगा नुकसान
भारत अगर अफगानिस्तान को बासमती का निर्यात करता है तो इससे उसे बड़ा फायदा मिलेगा। वहीं पाकिस्तान को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान में बासमती की सालाना खपत 5 लाख टन है। अफगानिस्तान का पाकिस्तान से जमीनी संपर्क है, जिसके चलते वो अपनी जरूरत का बासमती चावल पाकिस्तान से ही खरीदता आया है। भारत और पाकिस्तान के बीच ये व्यापार पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पाक अपना एक बड़ा बाजार खो सकता है।
अफगानिस्तान ने क्यों किया भारत का रुख?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अधिकांश व्यापार होता आया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच रिश्ते सही नहीं हैं। इस कड़वाहट के कारण दोनों के बीच व्यापारिक रिश्ते भी कमजोर हुए हैं। बिजनेसलाइन की रिपोर्ट की मानें तो अफगानिस्तान फिलहाल दुबई और ईरान के व्यापारियों के माध्यम से इनडायरेक्ट रूप से कुछ भारतीय बासमती चावल की खरीदी करता है, जिससे लागत बढ़ जाती है।
भारत-अफगान के बीच बासमती का व्यापार
भारत से अफगानिस्तान को बासमती चावल का निर्यात सालों से सीमित रहा है। 2005-06 में भारत ने अफगान को लगभग 63 टन चावल का निर्यात किया गया था। कुछ समय के अंतराल के बाद, निर्यात 2010-11 में फिर से शुरू हुआ और तब से लगातार कम स्तर पर निर्यात बना हुआ है। भारत की ओर से अफगानिस्तान को बासमती चावल का सबसे अधिक निर्यात 2020-21 में किया गया। जब भारत ने 108.9 करोड़ रुपये मूल्य का 19,440 टन बासमती चावल निर्यात किया। अप्रैल 2026 में, निर्यात 979 टन रहा, जिसका मूल्य 7.74 करोड़ रुपये था।


