गुरुग्राम में जमीन की डिजिटल पैमाइश पर सवाल, करोड़ों की जीएनएसएस मशीनें बनीं शोपीस

जमीन की सटीक पैमाइश के लिए खरीदी गई आधुनिक जीएनएसएस रोवर मशीनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दावा किया गया था कि इन मशीनों से जमीन की पैमाइश सेंटीमीटर स्तर तक सटीक होगी। जिले में इनकी कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में सभी तहसीलों में उपलब्ध कराई गई 15 मशीन शोपीस बनकर रह गई हैं।

छह तहसीलों में दो-दो और उप तहसील में एक-एक जीएनएसएस रोवर मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं। इन मशीनों की मदद से जमीन की डिजिटल पैमाइश कर विवादों को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था। मशीनों की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। लेकिन आरोप है कि पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी के अभाव में ये मशीनें नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं हो पा रही हैं।

पटवारी और कानूनगो ने इन मशीनों से पैमाइश में बड़ा अंतर आने की शिकायत की। उसके बाद अपर्णा आश्रम की जमीन की पैमाइश जीएनएसएस रोवर मशीन से जिला राजस्व अधिकारी विजय यादव और वजीराबाद के तहसीलदार गुरुदेव की निगरानी में कराई गई। इस दौरान मौके पर पुरानी पैमाइश और मशीन से की गई पैमाइश में करीब 15 से 20 फुट तक का अंतर सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद मशीनों की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं।

उपायुक्त ने भू-अभिलेख विभाग के निदेशक को भेजी रिपोर्ट

जिले में रोवर मशीन के संचालन और उससे तैयार किए जा रहे भू-अभिलेख संबंधी कार्यों की जांच में कुछ तकनीकी कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को लेकर उपायुक्त ने भू-अभिलेख विभाग के निदेशक को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 19 से 22 अप्रैल तक किए गए निरीक्षण के दौरान मशीन की कार्यप्रणाली, डेटा की शुद्धता और सर्वे प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं का परीक्षण किया गया।

मास्टर ट्रेनर के मार्गदर्शन में वजीराबाद, बादशाहपुर, मानेसर, पटौदी तहसील के विभिन्न गांवों में मशीनों से सर्वे किया गया। जांच में मुख्य रूप से रोवर मशीन से प्राप्त आंकड़ों की सटीकता, जीपीएस व कार्स नेटवर्क से जुड़ाव, जियो-रेफरेंसिंग, सीमा निर्धारण और डेटा समेकन (कंसोलिडेशन) से संबंधित विषयों पर ध्यान दिया गया। रिपोर्ट में कुछ तकनीकी सुधारों की आवश्यकता बताई गई है ताकि भू-अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित हो सके।

रोवर मशीन से पैमाइश में मिली खामियां

फरुखनगर तहसील के गांव राजूपुर में रोवर मशीन से की गई पैमाइश में कई तकनीकी खामियां सामने आने के बाद तहसीलदार फरुखनगर ने जिला उपायुक्त को रिपोर्ट भेजी है। सर्वे आफ इंडिया की ओर से भेजे गए ट्रेनर के साथ पटवारी, मास्टर ट्रेनर, प्रशिक्षु पटवारी व गिरदावर की मौजूदगी में गांव राजूपुर में रोवर मशीन से पैमाइश कराई गई थी। एक दिन में करीब 30 किला नंबरों की मौके पर पैमाइश की गई।

जांच के दौरान पाया गया कि किला नंबरों की डोल करीब 15 फीट उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है। जो मौके की स्थिति और पूर्व पैमाइश से मेल नहीं खाती। रिपोर्ट में बताया गया कि रोवर मशीन व टैब के इस्तेमाल के दौरान कई तकनीकी दिक्कतें आईं। खुले आसमान के नीचे टैब ज्यादा गर्म हो रहा था। रोवर का बार-बार कनेक्शन लास हो रहा था। बैटरी चार्ज होने में अधिक समय लग रहा था और फील्ड में टैब कई बार धीमा व हैंग हुआ।

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