अकाल तख्त व संविधान के अधिकारों पर छिड़ी बहस, सेवानिवृत्त IAS ने राज्यपाल से की अहम हस्तक्षेप की अपील

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 पंजाब में धार्मिक और संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस तेज हो गई है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डाॅ. जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा बनाए रखने और संवैधानिक संस्थाओं के साथ संभावित टकराव रोकने की अपील की है।

डाॅ. राजू ने पत्र में कहा कि पंजाब को ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए, जहां किसी को संविधान और श्री अकाल तख्त साहिब के बीच चयन करना पड़े। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और अधिकार समान रूप से संरक्षित रहना जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों के अधिकार पर बड़ा सवाल

उन्होंने दो हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए संवैधानिक सवाल उठाए। पहली घटना जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026 से जुड़ी है। इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने वाले सिख मंत्रियों और विधायकों को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किए जाने पर डाॅ. राजू ने कहा कि विधायक संविधान के तहत अपने विधायी दायित्व निभाते हैं।

अनुच्छेद 194 उन्हें स्वतंत्र रूप से कानून बनाने का विशेषाधिकार देता है। ऐसे में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से किसी गैर-संवैधानिक मंच पर जवाब मांगना संवैधानिक बहस का विषय है।

धार्मिक सेवा निर्देश पर संवैधानिक सवाल

दूसरी घटना में पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को कथित विवादित टिप्पणी मामले में धार्मिक सेवा करने का निर्देश देने का उल्लेख किया गया। डाॅ. राजू ने कहा कि कोई भी वैधानिक संस्था केवल संविधान और कानून से मिली शक्तियों के भीतर ही काम कर सकती है।

उन्होंने चेताया कि यदि धार्मिक और संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव बढ़ा तो दोनों की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी और सामाजिक विभाजन गहरा सकता है। डा राजू ने राज्यपाल से इन मुद्दों पर संवैधानिक विशेषज्ञों की राय लेने का आग्रह किया है।

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