‘संदेह अकाट्य साक्ष्य का विकल्प नहीं’, दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी को किया बरी

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 परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (सर्कमस्टेंशियल एविडेंस) के मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए एक अपीलकर्ता गिर राज को बरी कर दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह अकाट्य साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता। पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपित को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि के आदेश को रद कर दिया।

पीठ ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपित के अपराध को संदेह से परे साबित करने के लिए परिस्थितियों की एक पूरी और अटूट कड़ी स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा।

यह मामला 12 और 13 मई 1998 की दरमियानी रात हुई एक हत्या के मामले से जुडा है। ट्रायल कोर्ट ने गिर राज को उम्रकैद और तीन हजार जुर्माना की सजा सुनाई थी।

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