सूत्रों का दावा—ईस्ट क्षेत्र में सावेल क्रमांक-13 और 15 की कटिंग के दौरान स्क्रैप की निगरानी पर सवाल, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज
सिंगरौली। एनसीएल की दूधिचूआ परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला परियोजना के ईस्ट क्षेत्र में स्क्रैप के रूप में काटे जा रहे सावेल मशीनों से जुड़े कथित अनियमितताओं का है। सूत्रों के अनुसार, ईस्ट क्षेत्र स्थित कैंटीन के नीचे सावेल क्रमांक-13 और सावेल क्रमांक-15 की स्क्रैप के रूप में कटिंग का कार्य एक निजी कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन कटिंग के बाद निकलने वाले स्क्रैप को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि कटिंग के बाद निकलने वाला स्क्रैप मौके से बाहर तो निकलता है, लेकिन संबंधित स्क्रैप मौके से रात में गायब हो जाता है। मतलब उसका पूरा रिकॉर्ड और अंतिम गंतव्य स्पष्ट नहीं है।

सबसे अधिक चर्चा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हो रही है। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि परियोजना के सुरक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की मिली भगत से ये खेल जारी है। सूत्र ये बताते है कि इस खेल में किसी श्रीवास्तव और निर्भव नामक व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। उक्त व्यक्तियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सावेल मशीनों का स्क्रैप नियमित प्रक्रिया के तहत काटा जा रहा है, तो उसका पूरा हिसाब-किताब, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन रिकॉर्ड और अधिकृत भंडारण स्थल क्या है? यदि सब कुछ नियमानुसार हो रहा है, तो परियोजना प्रबंधन को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

यदि स्क्रैप सामग्री का उचित लेखा-जोखा नहीं रखा जा रहा है, तो इससे एनसीएल को आर्थिक नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी बेहद आवश्यक है।
अब निगाहें एनसीएल प्रबंधन पर हैं। क्या परियोजना प्रबंधन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या स्क्रैप के आवागमन और भंडारण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा? और क्या सुरक्षा विभाग के जिन अधिकारियों के नाम चर्चाओं में हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होगी? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही सामने आएंगे।
अगले अंक में इस मामले से जुड़े नाम का खुलासा…


