सिंगरौली। जिले के नवानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित एनसीएल की अमलोरी परियोजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। परियोजना के खदान क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से संचालित ड्रिल मशीन क्रमांक-9 आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गई। घटना के बाद परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों के अनुसार, यह घटना अमलोरी परियोजना के तुर्रा सीम फॉल्ट क्षेत्र में हुई, जहां ड्रिल मशीन क्रमांक-9 कार्यरत थी। बताया जा रहा है कि अचानक मशीन में आग लग गई और कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते पूरी मशीन आग की लपटों में घिर गई।

कर्मचारियों का दावा है कि जिस स्थान पर मशीन खड़ी थी, वहां तक फायर ब्रिगेड का वाहन पहुंच पाना संभव नहीं था। यही वजह रही कि समय पर आग पर काबू नहीं पाया जा सका और करोड़ों रुपये की कीमत वाली मशीन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।घटना के बाद परियोजना प्रबंधन की तैयारियों और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मशीन को ऐसे स्थान पर तैनात किया गया था जहां अग्निशमन वाहन भी नहीं पहुंच सकता, तो आपात स्थिति से निपटने की क्या व्यवस्था की गई थी?
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि अमलोरी परियोजना में सुरक्षा संबंधी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद परियोजना प्रबंधन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। परियोजना प्रबंधन की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आग लगने की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
- आखिर करोड़ों रुपये की मशीन जलकर नष्ट होने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- क्या इस घटना की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?
पूरे मामले पर अब सभी की नजरें एनसीएल प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


