अरघा खांची जिला दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंचे गिद्धों के सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहा है। इस वर्ष प्रजनन मौसम में जिले में चार प्रजातियों के गिद्धों का सफल प्रजनन दर्ज किया गया है। गिद्ध विशेषज्ञ कृष्ण भुसाल के अनुसार अब तक कुल 33 चूजे घोंसलों से उड़ान भरने में सफल रहे हैं, जो संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
छत्रदेव ग्रामीण नगरपालिका के वन क्षेत्रों में हिमालयी गिद्धों ने चीड़ के पेड़ों पर 23 घोंसले बनाए थे, जिनमें से 15 घोंसलों से चूजे सफलतापूर्वक उड़ान भर चुके हैं। वहीं मल्लरानी ग्रामीण नगर पालिका के घेरेभीर क्षेत्र में हिमालयी गिद्ध और हड्डी तोड़ने वाले गिद्धों के कुल 25 घोंसले दर्ज किए गए, जिनमें अधिकांश में सफल प्रजनन हुआ है।
अवधि में चूजे बड़े होकर उड़ान भरते हैं
जानकारों के अनुसार गिद्ध वर्ष में केवल एक बार एक अंडा देते हैं और उनका प्रजनन चक्र काफी लंबा होता है, जो अश्विन-कात्तिक से बैशाख-ज्येष्ठ तक चलता है। अवधि में चूजे बड़े होकर उड़ान भरते हैं। इस वर्ष छह अलग-अलग स्थानों पर सफेद गिद्ध ने भी सफल प्रजनन किया है, जिनमें संधीखरका, भूमिकस्थन ग्रामीण, मल्लरानी ग्रामीण, शीतागंगा ग्रामीण शामिल हैं।वन डिवीजन कार्यालय के सूचना अधिकारी केशव खड़का ने बताया कि लगातार सफल प्रजनन, उपयुक्त आवास संरक्षण, पर्याप्त भोजन की उपलब्धता और स्थानीय समुदाय की जागरूकता ने गिद्धों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अर्घाखांची अब गिद्ध संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण जिला बनकर उभर रहा है, जो जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।


