सिंगरौली। सिंगरौली जिले की नई जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी द्वारा जारी एक आदेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आदेश में विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि बिना सक्षम अनुमति के कोई भी पत्रकार अथवा सामान्य नागरिक विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करेगा। इस आदेश के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और मीडिया की भूमिका को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने पदभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही यह निर्देश जारी किया है। आदेश के अनुसार बिना अनुमति किसी भी पत्रकार को विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से मना किया गया है यानी कि अब पत्रकार विधालय परिसर में जब प्रवेश ही नहीं करवाएंगे तो वो विद्यालय के अंदर का निरीक्षण वीडियो बनाने या समाचार संकलन का कार्य भी नहीं कर पाएंगे। इस आदेश को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और मीडिया जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विद्यालय सरकारी संस्थान हैं और वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना मीडिया की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है तो इससे विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।चर्चा यह भी है कि अब जब पत्रकारों का विद्यालय में एंट्री नहीं होगी तो किसी विद्यालय में अव्यवस्था, लापरवाही या अन्य अनियमितताएं सामने नहीं आएंगी और उनके उजागर होने में कठिनाई हो सकती है।

पहले भी सुर्खियों में रहे हैं स्कूलों के मामले
सिंगरौली जिले में इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें विद्यालयों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। कुछ मामलों में शिक्षकों के विद्यालय में कथित रूप से नशे की हालत में पहुंचने की खबरें भी चर्चा में रही थीं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे। ऐसे मामलों को प्रमुखता से मीडिया द्वारा उजागर किए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई भी की थी। अब पत्रकारों के प्रवेश को लेकर जारी आदेश के बाद यह सवाल उठ रहा है कि भविष्य में यदि किसी विद्यालय में अनियमितता होती है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक कैसे होगी।
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यकाल की भी रही चर्चा
सिंगरौली शिक्षा विभाग पहले भी विवादों में रह चुका है। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एसबी सिंह के कार्यकाल में कथित खरीदी अनियमितताओं का मामला सुर्खियों में आया था। उस मामले में शिकायतों के आधार पर जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार उस प्रकरण में जांच अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रश्न जिनका जवाब जरूरी
- क्या सरकारी विद्यालयों में पत्रकारों के प्रवेश पर इस प्रकार की रोक उचित है?
- क्या यह आदेश केवल विद्यालय या उससे जुड़े लोगों के करतूत छिपने हेतु जारी किया गया है।
- यदि किसी विद्यालय में अनियमितता हो तो उसकी स्वतंत्र पड़ताल कैसे होगी?
- क्या इस आदेश की समीक्षा की जाएगी?
हालांकि, इस मामले में अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी, कविता त्रिपाठी का कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।


