महाराष्ट्र की सियासत में ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) गठबंधन एक बार फिर पटरी से उतरती नजर आ रही है। मानसून सत्र की रणनीनि तय करने से पहले बुलाई गई बैठक में विपक्षी गठबंधन के 60 में से 23 विधायक अनुपस्थित रहें। शरद पवार, जयंत पाटिल और नाना पटोले जैसे बड़े नेता भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
हालांकि, इस बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और ठाकरे सेना के संकटमोचक संजय राउत बैठक में उपस्थित थे। लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों के गैरमौजूदगी की को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए सहयोगियों से पूछा कि क्या हम सचमुच साथ हैं?
क्या हम सचमुच साथ हैं?
बैठक के दौरान ठाकरे ने पूछा, “हम कहते हैं कि हम साथ हैं… लेकिन क्या हम सचमुच साथ हैं? क्या हम सदन में महा विकास अघाड़ी के रूप में एकजुट हैं? क्या हम मुद्दों को एक साथ उठाते हैं?”
दरअसल, बीते दिनों उद्धव गुट के छह सांसदों के पाला बदलकर एकनाथ शिंदे खेमे में जाने के बाद अब विधायकों की इस तरह की सामूहिक बेरूखी को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा होने लगी है कि वैचारिक विरोधाभासों और राजनीतिक अवसरवाद पर टिके महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन का अंत नजदीक है।
क्या बोले ठाकरे?
पिछले चार सालों में दूसरी बार जब उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी शिवसेना गुट में शामिल हो गए, तो उन्होंने अपने नेताओं और गठबंधन से उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हुए कहा, “जो लोग चले गए हैं… उन्हें जाने दो।”
हम एक बड़ी ताकत हैं
उन्होंने कहा कि महा विकास अघाड़ी के रूप में हम एक बड़ी ताकत हैं। ठाकरे ने पार्टी के सदस्यों से एकजुट होकर काम करने, संयुक्त बैठकें करने और हार के बावजूद एकता दिखाने के लिए रैलियां आयोजित करने का आह्वान किया।
गौरतलब है कि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों द्वारा ठाकरे की पार्टी छोड़कर शिंदे का साथ देने के बाद फिलहाल किसी अन्य विद्रोह की कोई खबर नहीं है। लेकिन जून 2022 में मूल शिवसेना में विद्रोह हुआ था, ठीक वैसी ही वैचारिक और व्यावहारिक रूपरेखा जून 2023 में एनसीपी (NCP) के भीतर भी दोहराई गई।


