दैनिक जागरण अभियान, ये फुटपाथ हमारा है: फुटपाथों पर कब्जा, आठ साल बाद भी नहीं बदले हालात

शहर में फुटपाथ पर बढ़ते अतिक्रमण के विरुद्ध अब नागरिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त नागरिक संगठन ने मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराते हुए फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ आज दुकानों, अवैध पार्किंग और अस्थायी कब्जों की भेंट चढ़ चुके हैं। नतीजतन लोगों को जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलना पड़ रहा है।

बता दें कि, दैनिक जागरण इन दिनों फुटपाथों पर हुए कब्जे को लेकर समाचारीय अभियान चला रहा है। उसी क्रम में जिम्मेदार नागरिक संगठन भी अब सामने आकर शहर में फुटपाथ बचाने की अपील कर रहे हैं।

संगठन के महासचिव सुशील त्यागी ने कहा कि नैनीताल हाई कोर्ट ने वर्ष 2018 में सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थलों से अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद शहर के अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि आदेशों का समयबद्ध पालन हुआ होता तो आज देहरादून के फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित होते।

संगठन ने ज्ञापन में हाई कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया है, जिसमें सड़कों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए थे।

संगठन का कहना है कि अदालत की मंशा साफ थी कि पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता मिले, लेकिन धरातल पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि आज भी शहर के कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों का अस्तित्व संकट में है।

फुटपाथ नहीं, सड़क पर चलने को मजबूर लोग

राजपुर रोड, पलटन बाजार, धामावाला, हरिद्वार रोड, सहारनपुर रोड व घंटाघर जैसे व्यस्त इलाकों में पैदल चलना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

फुटपाथों पर सामान, रेहड़ियां, अस्थायी ढांचे और वाहन खड़े होने से राहगीरों को सड़क का सहारा लेना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है।

कार्रवाई होती है, लेकिन टिकती नहीं

संगठन का कहना है कि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान जरूर चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

हटाए गए कब्जे दोबारा खड़े हो जाते हैं और फुटपाथ फिर से गायब हो जाते हैं। ऐसे में केवल अभियान चलाने के बजाय स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने की जरूरत है, ताकि एक बार खाली हुए फुटपाथ दोबारा अतिक्रमण की चपेट में न आएं।

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