झारखंड विधानसभा समिति की सख्ती, धनबाद के स्कूल-कॉलेज पुस्तकालयों की होगी जांच

जिले के सभी सरकारी, अल्पसंख्यक, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों, कालेजों और सार्वजनिक पुस्तकालयों की व्यवस्था को अब पूरी तरह से खंगाला जाएगा। राज्य में पठन-पाठन की संस्कृति, इंफ्रास्ट्रक्चर और ज्ञान संबंधी संसाधनों का सही मूल्यांकन करने के लिए झारखंड विधानसभा की पुस्तकालय विकास समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक झा ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

झारखंड विधानसभा की पुस्तकालय विकास समिति की पिछले माह हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि राज्य के सभी जिलों से पुस्तकालयों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए। इसी आलोक में विधानसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव संतोष कुमार सिंह ने सभी उपायुक्तों को पत्र जारी किया था।

इसके आलोक में डीईओ ने बीआरपी, सीआरपी और बीपीओ के सहयोग से डाटा जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। डीईओ अभिषेक झा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इसके लिए किसी भी तरह के स्मार पत्र का इंतजार न करें और निर्धारित एक सप्ताह के अंदर हार्ड एवं साफ्ट कापी में हर हाल में रिपोर्ट कार्यालय को सौंपना सुनिश्चित करें।

बतानी होगी पुस्तकालय भवन की स्थिति

शिक्षा विभाग से जारी पत्र के अनुसार धनबाद के सभी पुस्तकालयों से जुड़ी बारीक से बारीक जानकारी जुटाई जा रही है। सर्वे में मुख्य रूप से पुस्तकालयों में कुल पुस्तकों की संख्या के साथ-साथ उनका प्रकार (शैक्षणिक, प्रतियोगी परीक्षा, साहित्यिक, धार्मिक, दार्शनिक, विज्ञान एवं तकनीकी) बताना होगा।

पुस्तकालय भवन की स्थिति कैसी है? छात्रों के बैठने की व्यवस्था, बिजली-बत्ती, पेयजल और इंटरनेट एवं डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता है या नहीं, क्या पुस्तकालयों में शौचालय की सुविधा है? यदि नहीं, तो इसका ठोस कारण बताना होगा।

किन-किन संस्थानों में पुस्तकाध्यक्ष के पद स्वीकृत हैं, कहां पदस्थापन हुआ है और कहां सीटें खाली हैं, इसका पूरा ब्योरा देना होगा। यदि किसी विद्यालय या महाविद्यालय में पुस्तकालय संचालित नहीं है, तो इसके क्या कारण हैं।

डीएमएफटी और सीएसआर फंड का देना होगा हिसाब

सर्वे में पिछले तीन वर्षों के दौरान डीएमएफटी और सीएसआर फंड से पुस्तकालयों के विकास, अपग्रेडेशन और संवर्धन के लिए मिली राशि का भी हिसाब मांगा गया है।

अधिकारियों को बताना होगा कि इस मद में कितनी राशि कब मिली और उस राशि से धरातल पर क्या-क्या काम कराए गए। इसके अलावा पुस्तक दान अभियान के तहत लोगों से दान में मिली किताबों का विवरण भी रिपोर्ट में देना होगा।

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