महेंद्रगढ़ में अतिक्रमण के आगे प्रशासन पस्त, जाम के झाम में फंसा शहर

शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के प्रशासनिक दावे पूरी तरह से खोखले और विफल साबित हो रहे हैं। बाजारों में बेकाबू हो चुके अतिक्रमण ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर के मुख्य बाजारों और सड़कों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि वहां से पैदल गुजरना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

विडंबना यह है कि जिस गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए स्थानीय प्रशासन समय-समय पर बड़े-बड़े वादे करता है, वे धरातल पर आते-आते पूरी तरह हवा हो जाते हैं। नगरपालिका (नपा) और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते आज पूरा शहर जाम के दलदल में फंस चुका है।

पूर्व एसडीएम अनिल यादव व कनिका गोयल के प्रयासों को लोग आज भी कर रहे याद

अतीत के प्रशासनिक सुधारों पर नजर डालें तो शहरवासी आज भी उन सुनहरे दिनों को याद करते हैं जब पूर्व एसडीएम अनिल यादव और पूर्व एसडीएम कनिका गोयल ने कड़े और ठोस कदम उठाकर शहर को एक नई दिशा दी थी। पूर्व एसडीएम अनिल यादव के ईमानदार प्रयासों के कारण ही शहर के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील माने जाने वाले 11 हट्टा और सर्राफा बाजार की सड़कों का चौड़ीकरण और कायाकल्प हो सका था।

उन्होंने न सिर्फ इन सड़कों को सुव्यवस्थित रूप से बनवाया, बल्कि शहर को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर कानून का इकबाल बुलंद किया था। उनके इस सराहनीय कार्य से बाजारों में रौनक और व्यवस्था दोनों लौट आई थीं।

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पूर्व एसडीएम कनिका गोयल ने भी अपने कार्यकाल में बेहद शानदार और प्रभावी कार्य किया था। उन्होंने अतिक्रमणकारियों पर लगातार अंकुश लगाए रखा और बाजारों में किसी भी प्रकार की अवैध कब्जेदारी को पनपने नहीं दिया। इन दोनों पूर्व अधिकारियों की कार्यशैली और दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना आज भी शहर का हर नागरिक और जागरूक व्यापारी खुले दिल से करता है।

अब नपा व प्रशासन की आंखें बंद, व्यापारी बेखौफ

परंतु वर्तमान में स्थिति इसके बिल्कुल उलट हो चुकी है। अब नपा व प्रशासनिक अधिकारियों ने जैसे अपनी आंखें पूरी तरह से बंद कर ली हैं। उनके ढीले रवैये का ही परिणाम है कि शहर के दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। व्यापारियों ने अपनी दुकानों के आगे दस-दस फीट तक सामान फैलाकर पक्के व अस्थायी अतिक्रमण कर लिए हैं। इतना ही नहीं, दुकानों के आगे बड़े-बड़े टीनशेड लगा दिए गए हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई आधी से भी कम रह गई है। बचा-कुचा रास्ता अवैध पार्किंग और बेतरतीब खड़े वाहनों की भेंट चढ़ जाता है।

भीषण जाम से आमजन परेशान, धंधा हुआ चौपट

सड़कों पर पसरे इस अवैध साम्राज्य के कारण शहर के मुख्य बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। इस अव्यवस्था का सबसे सीधा और बुरा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। जाम और अत्यधिक भीड़भाड़ के डर से ग्राहक अब बाजारों में घुसने से कतराने लगे हैं, जिसके कारण स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, राहगीरों और वाहन चालकों के बीच आए दिन होने वाली नोकझोंक व झगड़े आम बात बन चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल नोटिस और औपचारिकता तक ही सीमित रह गई है। जब तक नपा और प्रशासन कागजी मुस्तैदी से बाहर निकलकर धरातल पर कड़ा एक्शन नहीं लेंगे, तब तक शहर की यह सूरत नहीं बदलेगी।

नगरपालिका प्रधान रमेश सैनी ने मामले पर सफाई देते हुए कहा, ‘शहर में अतिक्रमण की समस्या दोबारा बढ़ने की शिकायतें मिली हैं। प्रशासन इसे लेकर गंभीर है। जल्द ही एसडीएम और नगरपालिका की एक संयुक्त टीम का गठन किया जाएगा, जिसके बाद पूरे शहर में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा। सड़कों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर आमजन और व्यापारियों को जाम से स्थायी राहत दिलाई जाएगी।’

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